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आठ गांवों के ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक लगाई गुहार, पर नहीं बनी सड़क

सीवान10 घंटे पहले

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  • बारिश होने के बाद लोगों का घरों से निकलना हो जाता है मुश्किल, हर दिन गिरकर चोटिल होते हैं ग्रामीण
  • जिला मुख्यालय से महज 15 किमी की दूरी पर जीरादेई के गांवों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं

जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर जीरादेई प्रखंड के मियां के भटकन पंचायत के संजलपुर, संठू, बंठू सलोना, मनिया, बढ़ेया, फजुल्ही, शंकरपुर, शंकरा गांव के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं। प्रखंड मुख्यालय से लगे इस गांव तक जाने के लिए सड़क तक नहीं है। यह समस्या विगत कई वर्षों से है। ग्रामीणों ने जगह-जगह सड़क के लिए गुहार लगाई। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। संजलपुर से आंदर बाज़ार होते हुए लगभग 4 किलोमीटर तक ग्रामीणों को अपने पंचायत में जाने के लिए मुख्यपथ आज तक नही बना है।

लगभग दो सौ से ज्यादा घरों की आबादी है। जहां दो हजार से अधिक लोग गांव में रहते हैं। इन ग्राम वासियों को अपने गांव से बाहर जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है। गांव वासी आज भी पुराने कच्चे मार्ग से ही आना-जाना करते हैं। गांव के बच्चे, बुजुर्ग, महिला- पुरुष को यदि गांव से बाहर स्कूल, अस्पताल, प्रखंड मुख्यालय, जिला मुख्यालय या अन्य कहीं भी जाना है तो इन ग्रामवासियों को गांव की किसी कच्ची सड़क से गुजरना होता है। बाकी मौसम में तो लोग किसी प्रकार से निस्तार कर लेते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में इस कच्चे रास्ते से निकलना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन होता है।

मनिया, बढ़ेया, शंकरपुर, बंठू से आंदर तक जाने वाले रास्ते आज भी कच्चे है। कई वर्षों से लोगों की मांग सड़क सुधार को लेकर रही है, पर ग्रामीणों की तकलीफों से मानों प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार ही ना हो। उनकी फरियाद पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। इसके कारण लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
विधायक ने भी बातों को किया अनसुना
संजलपुर से शंकरा मुख्यपथ के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक को कई बार आवेदन दे चुके है। जबकि इस मार्ग में कोई अड़चन नही है। फिर भी आज तक इस पथ के लिए स्वीकृति नही मिली। सड़क कई वर्षों से कच्ची है। लेकिन कोई समाधान नही निकला। इस 4 किलोमीटर सड़क का निर्माण आज तक नहीं होने से ग्रामवासियों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क के लिए ही लोगों ने किया था मतदान

ग्रामीणों में सड़क नहीं होने के कारण आक्रोश है। वही ग्रामीणों ने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में स्थानीय विधायक रमेश सिंह कुशुवाह को सबसे ज्यादा वोट इसी पंचायत से मिला था। उसके पूर्व में महिला विधायक थी। अपने कार्य के समय गांव मे देखने तक नहीं आई। इसके कारण लोगों ने महिला विधायक को बदलकर रमेश सिंह कुशुवाहा को जीत दिलायी। चुनाव जीते पांच साल हो गए हंै। एक बार भी पंचायत या गांव में नहीं आए हैं। शिकायत भी की गयी। लेकिन कोई सुनवाई नही हुई।

अधिक समस्या बारिश में होती है। बारिश में पूरा रास्ता दलदल युक्त हो जाता है। पैदल निकलना भी मुश्किल है। पूरे कच्चे रास्ते में गड्ढे पानी का भराव मिट्टी के कारण निकलना आसान नहीं होता। वही किसी की तबियत खराब होने या अन्य जरूरत पड़ने पर भी साइकिल, दो पहिया वाहन समेत चार पहिया वाहन भी नहीं आता जाता है। वाहन के पहिए मिट्टी में धंस जाते है।

गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक समस्या होती है। यह समस्या कोई आज की नहीं है बल्कि वर्षों की है एक तरफ तो प्रशासन और जनप्रतिनिधि जिले में सड़क विकास का ढिंढोरा पीट रहे हैं। तो दूसरी ओर प्रखंड मुख्यालय के नजदीक ग्रामीणों को चलने के लिए सड़क तक नसीब नहीं है। अगर कोई बीमार हो जाता है तो उसे अस्पताल तक ले जाने में पसीने छूट जाते हैं।


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