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आयुर्वेद और योग आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जारी, स्वास्थ्य मंत्री बोले- कोरोना से बचाव में अश्वगंधा और गिलोय जैसी औषधियां जरूरी

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नई दिल्ली21 मिनट पहले

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वर्चुअल प्रोग्राम के जरिए आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद नाइक और डॉ. हर्षवर्धन की मौजूदगी में प्रोटोकॉल जारी किया गया।

  • कोरोना से बचाव के लिए अदरक, धनिया, तुलसी की पत्ती या जीरा आदि डालकर उबाले गए पानी का सेवन करना चाहिए
  • प्रोटोकॉल में कहा गया- कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, साफ-सफाई और हाथों की स्वच्छता के अलावा मास्क भी जरूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कोरोनावायरस के क्लीनिकल मैनेजमेंट के लिए आयुर्वेद और योग पर आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल जारी किया। हर्षवर्धन ने मंगलवार को कहा कि मेडिकल स्टडी से इस बात की पुष्टि हुई है कि कोरोना से बचाव में अश्वगंधा, लौंग, गिलोय और आयुष-64 जैसे आयुर्वेदिक औषधियां काम आती हैं।

वर्चुअल प्रोग्राम के जरिए आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद नाइक और डॉ. हर्षवर्धन की मौजूदगी में प्रोटोकॉल जारी किया गया। हर्षवर्धन ने कहा- यह प्रोटोकॉल न केवल कोरोना के मैनेजमेंट के लिए एक जरूरी कदम है, बल्कि इस ट्रेडिशनल नॉलेज से आधुनिक समय की मेडिकल प्रॉब्लम्स को भी हल किया जा सकता है। दुर्भाग्य से आयुर्वेद को आजादी के बाद से अब तक बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका महत्व समझा।

प्रोटोकॉल में कहा गया है कि कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, साफ-सफाई और हाथों की स्वच्छता के अलावा मास्क पहनना जरूरी है। इसके साथ ही एक चुटकी हल्दी और नमक को गर्म पानी में डालकर गरारे करने चाहिए। त्रिफला को पानी में उबालकर पानी में यष्टीमधु यानी मुलेठी को भी उबालकर उस पानी से गरारे किए जा सकते हैं।

कम से छह से आठ घंटे की नींद जरूरी

अणु तेल, शादबिंदु तेल, तिल का तेल या नारियल का तेल की बूंदें नाक में डाली जा सकती हैं। इनके अलावा गाय के घी को भी दिन में एक या दो बार नाक में डालना चाहिए, खासकर जब घर से बाहर जाना हो और बाहर से घर लौटे हों। यूकेलिप्टस के तेल, अजवायन या पुदीने को पानी में डालकर दिन में एक बार भाप लेना चाहिए। कम से छह से आठ घंटे की भरपूर नींद लेनी चाहिए। कसरत करना चाहिए और योग प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।

प्रोटोकॉल में खानपान संबंधी

प्रोटोकॉल में खानपान संबंधी सलाह भी जारी की गई है। कोरोना से बचाव के लिए अदरक, धनिया, तुलसी की पत्ती या जीरा आदि डालकर उबाले गए पानी का सेवन करना चाहिए। ताजा, गर्म और संतुलित आहार लेना चाहिए। आधा चम्मच हल्दी 150 मिलीलीटर गर्म दूध में डालकर उसे रात में पीना चाहिए। अपच होने पर दूध नहीं पीनी चाहिए। आयुष काढ़ा या क्वाथ दिन में एक बार लेना चाहिए।

संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर या जिन इलाकों में ज्यादा मामले हों, वहां के लोगों को 15 दिन, एक महीने या आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनका सेवन करना चाहिए। ऐसे लोगों को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ अश्वगंधा या इसका एक से तीन ग्राम चूर्ण, इतनी ही मात्रा में दिन में दो बार गुडुची घनवटी या गिलोय घनवटी लेना चाहिए। इसके अलावा दिन में एक बार गर्म पानी के साथ च्यवनप्राश लेना चाहिए।

बगैर लक्षण वाले मरीजों के लिए सलाह

बगैर लक्षणों वाले कोरोना मरीजों को भी 15 दिन, एक महीने या आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार, दिन में दो बार गर्म पानी के साथ अश्वगंधा या इसका एक से तीन ग्राम चूर्ण, 15 दिन तक लेना चाहिए। दिन में दो बार गर्म पानी के साथ 375 मिलीग्राम गुडुची और पिप्पली तथा दिन में दो ही बार 500 मिलीग्राम की आयुष 64 टैबलेट लेनी चाहिए।

मामूली लक्षणों वाले मरीजों का भी आयुर्वेदिक इलाज

कोरोना संक्रमण के मामूली लक्षणों वाले मरीजों को अगर सांस लेने में तकलीफ न हो या ऑक्सीजन का स्तर कम न हो तो 15 दिन तक या आयुर्वेदिक डॉक्टर के सलाह के अनुसार, दिन में दो बार गर्म पानी के साथ 375 मिलीग्राम गुडची और पिप्पली और दिन में दो ही बार 500 मिलीग्राम की आयुष 64 टैबलेट लेनी चाहिए। साथ ही यह भी सलाह दी गई है कि इन दवाइयों को लेने के साथ खानपान संबंधी या अन्य नियमों का भी पालन करना चाहिए।

योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है

संक्रमण से मुक्त होने वाले मरीजों के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताए गए हैं। योग संबंधी प्रोटोकॉल में कई आसनों के बारे में बताया गया है, जिससे श्वसन प्रणाली दुरुस्त होती है। साथ ही चिंता और तनाव कम होता है। योग से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। योग प्रोटोकॉल में संक्रमण मुक्त हुए व्यक्तियों के लिए कई आसन बताए गए हैं, जिनसे फेफड़े की क्षमता बढ़ती है और चिंता, बेचैनी कम होती है।

इन सबके अलावा संक्रमण के विभिन्न लक्षणों जैसे बुखार के साथ बदन दर्द, सिर दर्द, खांसी, गले की खराश, स्वाद का खत्म होना, थकान, ऑक्सीजन की कमी, डायरिया और दम फूलने की स्थिति में ली जाने वाली कुछ आयुर्वेदिक दवाएं भी बताई गई हैं, जिन्हें आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह पर लिया जा सकता है।


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