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कमीशन के चक्कर में पंचायतों में फेल हुई सात निश्चय के तहत हर घर नलजल योजना

डुमरांव9 घंटे पहले

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  • पंचायतों में नल-जल योजना के लिए नई सड़कों की कर दी जा रही है खुदाई

विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं। लोगों की चिंता और गुस्सा सार्वजनिक स्तर पर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण के अधिकांश हिस्सों में लोगों में गुस्सा उन झूठ के पुलिंदों से है। जिन्हें सात निश्चय योजना’ नाम दिया गया है। जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया गया था। दावा था कि सात निश्चय में हर घरों में नल का पानी, बिना किसी भेदभाव का पहुचेगा।

चक्की प्रखंड के अरक पंचायत के ग्यारहाें वार्डों में आधा अधूरा लटका हुआ है। यह योजना करीब पांच सालों से इस पंचायत में काम कर रही है। परन्तु पंचायत के किसी भी वार्ड में यह योजना शुद्धत: पूर्ण नही दिखाई दे रही है। जनता तक पहुंचने के अपने लक्ष्य में बुरी तरह से चूक गई है। इसका उद्देश्य सभी ग्रामीण परिवारों को पाइपलाइन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन अबतक नही हो सका।

ग्रामीणों ने कई बार की शिकायत

जल की बड़ी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार विभाग के तकनीकी सहायक से शिकायत किया परंतु विभागीय लापरवाही इतनी ज्यादा है कि ग्रामीणों की बात कोई सुनने वाला नहीं है। जबकि चक्की प्रखंड के अरक पंचायत के अधिकतर घरों के चापाकल आर्सेनिक हो चुके है। इस योजना से ग्रामीणों में खुशी थी परन्तु विभाग और संवेदकों कि लापरवाही से हर घर नल जल योजना अरक पंचायत में अधर में लटका हुआ है ।

कहीं गलियों के बीचों बीच खुदाई तो कहीं अधूरे पड़े जलमीनार

अरक पंचायत मुखिया प्रतिनिधि राजू सिंह और पंचायत के ग्रामीणों ने बताया कि मुख्यमंत्री का यह योजना हमारे पंचायत के लिए वरदान नही श्राप है। नही पता था कि इस योजना में खोदाई से लेकर जलमीनार तक कमिश्नर खोरी है। पंचायत के कुछ वार्डों में ऐसी भी गलियां है। जहां से एक या दो ग्रामीण आ जा सकते है।

वैसी गलियों की खुदाई कर महीनों दिनों तक छोड़ दिया गया है। कहि खोदाई हुआ है तो कई पाइप ऐसी ही डाल कर छोड़ दिया गया है। अच्छी खासी गलियों को खोद कर बेकार कर दिया गया और यह योजना भी पांच साल हो गए और अब तक पूर्ण भी नहीं हुआ। जलमीनार कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है।

तीन साल बाद भी जलमीनार अधूरे

सरकार ने पीएचईडी के माध्यम से इस योजना को लागू करने के लिए अनुमानित रूप से करोड़ रुपये का निवेश किया था। पीएचईडी परियोजना को निष्पादित करने वाली नोडल एजेंसी है। इसे 10 मीटर गुणा 10 मीटर के भूखंड पर पानी के उपचार की इकाई लगाने का काम सौंपा गया था। वित्तीय वर्ष 2017-18 में काम शुरू करने के लिए धन आवंटित किया गया था।

प्रत्येक वार्ड में ढांचे बनाए गए, पानी के पाइप को भूमिगत डाला गया और गांवों में हर घर में नए नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति होनी थी। परन्तु इस पंचायत के सभी वार्डों में द्वारा देखा गया कि पंचायत के अधिकतर वार्डों में जलमीनार का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है ।


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