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चाचा नीतीश करते रह गए बैठक और भतीजे तेजस्वी ने बना लिया बिहार का सबसे बड़ा गठबंधन

पटनाएक मिनट पहलेलेखक: शालिनी सिंह

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नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव।

  • महागठबंधन में सीटों के तालमेल पर बना संशय खत्म, एनडीए के नेता अब भी बैठकों में लगे हैं
  • महागठबंधन के दलों ने मजबूती के लिए एक-दूसरे का साथ जरूरी समझा, एनडीए में एक-दूसरे के प्रति अविश्वास दिख रहा

बिहार के चुनावी मैदान में कौन जीतेगा और कौन हारेगा यह तो नतीजे बताएंगे लेकिन चुनाव से पहले की तैयारी में एनडीए पिछड़ गया है। भाजपा और जदयू के नेता सीटों पर तालमेल कर लेने की केवल बातें करते रह गए और राजद नेता तेजस्वी यादव ने यह कर दिखाया। तेजस्वी यादव ने कांग्रेस, वामपंथी दल और मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को लेकर बिहार में अपना सबसे बड़ा गठबंधन यानी महागठबंधन तैयार कर लिया है और इस तरह से महागठबंधन में सीटों के तालमेल पर बना संशय खत्म हो गया है। हालांकि सीट बंटवारे से नाखुश वीआईपी ने अब महागठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया है।

उधर, एनडीए के नेता अब भी बैठकों में लगे हैं। एनडीए की दोनों बड़ी पार्टियां चाहे वह भाजपा हो या जदयू या फिर नाराज होकर एक कोने में बैठी लोजपा, तीनों ही पार्टियां औपचारिक और अनौपचारिक बैठकों में लगी थीं। पटना के होटल मौर्या में महागठबंधन के नेता हाथ से हाथ पकड़े एक-दूसरे के साथ खड़े होने का ऐलान कर रहे थे। भाजपा के नेता रूपसपुर के एक फ्लैट मैं बैठ सीटों पर जदयू के साथ कैसे तालमेल करें इस पर माथापच्ची कर रहे थे। इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने रणनीतिकारों के साथ एक अणे मार्ग यानी मुख्यमंत्री आवास पर बैठकर कितनी सीटें जदयू के लिए लें, इस पर विचार कर रहे थे।

एनडीए में दिख रहा एक-दूसरे के प्रति अविश्वास
चाचा नीतीश की तुलना में गठबंधन के साथ तालमेल बिठाने में तेजस्वी यादव आगे निकल गए हैं। इसका कारण ये रहा कि शुरुआत से ही महागठबंधन के दलों ने मजबूती के लिए एक-दूसरे का साथ जरूरी समझा, जबकि इसके ठीक उलट एनडीए में एक-दूसरे के प्रति शुरुआत से ही अविश्वास दिखाई देता रहा है। भाजपा और जदयू दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे से अधिक से अधिक हिस्सेदारी लेने की होड़ में लगी हैं लेकिन इसके पीछे केवल अधिक से अधिक अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की चाहत ही नहीं बल्कि कुछ और है। असल में भाजपा को इस बात का डर है कि अगर जदयू के पास ज्यादा सीटें जाती हैं तो जदयू ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेगा और वह भाजपा से ज्यादा ताकतवर हो सकता है। इतना ताकतवर कि वह जब चाहे भाजपा से अलग हो जाए, जैसा कि 2009 में हुआ, या फिर सरकार में अपनी मनमानी चलाएं।

अब तो भाजपा के अपने भी करने लगे हैं सवाल
सीटों के तालमेल में लगातार हो रही देरी को लेकर भाजपा के अपने ही नेता अब सवाल खड़े करने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने शनिवार को एक वीडियो और बयान जारी कर एनडीए में सीटों के तालमेल में हो रही देरी पर चिंता जताई। आर के सिन्हा ने इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताया और कहा कि इस तरह की स्थितियां किसी भी पार्टी और गठबंधन के लिए सही नहीं हैं। यह कार्यकर्ताओं और नेताओं के मनोबल को भी नीचे गिरा रही हैं।


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