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जर्जर एनएच-80 और विक्रमशिला यूनिवर्सिटी पर क्या किया, क्या करेंगे? पूछेंगे वोटर फिर करेंगे वोट

कहलगांवएक दिन पहले

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  • विक्रमशिला यूनिवर्सिटी, बटेश्वर स्थान, डॉल्फिन सेंचुरी और एनटीपीसी है पहचान
  • बियाडा में नहीं लगी एक भी फैक्ट्री, इस पर भी प्रत्याशियों से होंगे सवाल-जवाब

कहलगांव के विक्रमशिला यूनिवर्सिटी को कभी शिक्षा का गढ़ माना जाता था। बटेश्वर स्थान, तीन पहाड़ी जहां धार्मिक रूप से क्षेत्र को प्रसिद्धि देते हैं, वहीं डॉल्फिन सेंचुरी पर्यावरण और एनटीपीसी विकास की कहानी कहते हैं। इन सबके बावजूद हर तरह की समृद्धि बटाेरे कहलगांव विधानसभा क्षेत्र में विकास की रफ्तार बेहद धीमी है।

इस बार चुनाव में भी यही मुद्दे हैं। जर्जर एनएच-80, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बियाडा में इन्वेस्टमेंट की कमी और सनोखर को प्रखंड बनाने का मुद्दा अहम होगा। इस बार वोटरों ने तय कर लिया है कि एनएच-80 और विक्रमशिला यूनिवर्सिटी के विकास के लिए क्या किया, क्या करेंगे? इसके बाद ही वोट करेंगे।

ये मुद्दे अहम हाेंगे
1. जर्जन एनएच-80 क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है। भागलपुर से कहलगांव महज 32 किलोमीटर जाने में भी दो घंटे से ज्यादा लग रहे हैं। जाम में फंसने पर कई बार 4-4 घंटे तक लग जाते हैं।
2. बियाडा की अधिग्रहित जमीन पर अब तक कोई भी फैक्ट्री नहीं लगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ सके।
3. विक्रमशिला सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए। इसके लिए राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण करनी थी। इसके लिए जिला प्रशासन ने जमीन की तलाश की। प्रस्ताव भी सरकार को भेजा। लेकिन इस पर आगे कोई कार्यवाही नहीं हुई।
4. सनोखर को प्रखंड बनाने की मांग लोग लंबे समय से कर रहे हैं। लेकिन इसे लेकर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

लोजपा से इन नामों पर चर्चा: इस बीच राजनीतिक गलियारों में हालिया कदम रखे सुभाष यादव के लोजपा से दावेदारी के चर्चे हैं। भागलपुर के डिप्टी मेयर राजेश वर्मा का नाम भी लोजपा से चल रहा है।
जदयू से हो सकते हैं ये चेहरे : 2015 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे नीरज मंडल एनडीए से तो जदयू से सांसद रहीं कहकशां परवीन, संजीव कुमार, दिवाकर सिन्हा के नाम भी उछाले जा रहे हैं।
महागठबंधन-एनडीए में होगा मुकाबला
वोटर महागठबंधन व एनडीए के बीच मुकाबला होने के कयास लगा रहे हैं। 9 बार कांग्रेस से विधायक रहे सदानंद सिंह की सीट इस बार भी महागठबंधन में कांग्रेस के नाम होगी। वे अपनी विरासत अपने बेटे शुभानंद मुकेश को देने की तैयारी में हैं। एनडीए ने अभी पत्ते नहीं खोले नहीं हैं। भाजपा से जिप सदस्य लीना सिन्हा, पवन यादव के नाम पर भी चर्चा है। पहले निर्दलीय लड़े पवन ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया है।

एनएच पर सकारात्मक जवाब आया है
एनएच-80 पर हमने राष्ट्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री से कई बार पत्राचार किया। इस मुद्दे को उठाया है। इस पर सकारात्मक जवाब भी आया है। चुनाव बाद काम होने की बात लिखित में दी गई है। बाकी पर भी काम होगा। – सदानंद सिंह, विधायक


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