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दिनभर तबाही मचाती रही बूढ़ी गंडक की बाढ़, शहर व आसपास के इलाकाें से ऊंची जगह पलायन करते रहे लोग

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मुजफ्फरपुर17 मिनट पहले

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बूढ़ी गंडक में बाढ़ के कारण सकरा के नए इलाकों में तबाही से लोग इस तरह सुरक्षित जगहों की ओर पलायन करने लगे हैं।

  • अब मीनापुर, मुशहरी और बोचहां प्रखंडों में भी फैला बूढ़ी गंडक का पानी
  • बागमती और गंडक के जलस्तर में लगातार आ रही है कमी

बूढ़ी गंडक नदी में लगातार जारी उफान शनिवार की शाम खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच कर थम गया। इससे बाढ़ प्रभावितों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, उनकी परेशानी अभी कम नहीं हुई है। शनिवार को दिन भर शहर के निचले इलाकों के साथ मीनापुर, कांटी, मुशहरी और बोचहां प्रखंड में बूढ़ी गंडक नदी का पानी फैलता रहा।

बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शनिवार को शहर के सिकंदरपुर में खतरे के निशान 52.53 मीटर से 15 सेंटीमीटर ऊपर 52.68 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। दिनभर नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होते रहने से शहर के निचले इलाके के मोहल्लों के साथ ही मिठनसराय तथा मेडिकल कॉलेज के आसपास के मोहल्लों के घरों में पानी प्रवेश करता रहा।

हालांकि, शाम में जलस्तर थमने के बाद लोगों ने पलायन करना बंद कर दिया। दिनभर कांटी प्रखंड के दादर कोल्हुआ के साथ शहर के सिकंदरपुर, अखाड़ा घाट, आश्रम घाट, चंदवारा, झील नगर, हनुमान नगर, शेखपुर, नजीरपुर इलाके में पानी तेजी से फैलता रहा।

दूसरी ओर, बागमती व गंडक नदी के जलस्तर में कमी जारी रही। बागमती नदी का जलस्तर कटौझा में खतरे के निशान 55.23 मीटर से नीचे 54.14 पर है। वहीं, गंडक नदी का जलस्तर रेवा घाट में खतरे के निशान 54.41 से नीचे 52.82 मीटर पर है।
बाढ़ पीड़ितों को अब तक नहीं मिला सरकारी अनुदान
सिकंदरपुर कुंडल की जूली देवी ने अपने डूबे घर को दिखाते हुए बताया कि हम लोगों का घर दूसरी बार पानी में पूरी तरह डूब गया है। इससे पहले अब तक कभी भी अक्टूबर महीने तक बाढ़ का पानी नदी के तल से ऊपर नहीं रहा है। लेकिन इस बार लगातार 4 महीने से यह स्थिति झेलनी पड़ रही है। संगीता देवी, निशा देवी एवं महेंद्र साहनी ने बताया कि हम लोगों को सरकार से मिलने वाली सहायता राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है।

बाढ़ के पानी में डूबने से बच्ची समेत दाे की माैत

सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र के घोसौत गांव के वार्ड 7 के बेलवा गाछी के नजदीक बाढ़ के पानी में डूबने से सुखलाल मांझी के 40 वर्षीय पुत्र रामसुंदर मांझी की माैत हाे गई। वह शनिवार की दोपहर नदी के उस पार घोसौत चक्की गांव से मजदूरी कर हाथ में कुदाल लेकर घर लौट रहा था। नाव नहीं रहने के कारण पानी पैदल ही पार करना शुरू कर दिया।

संतुलन बिगड़ने से वह उसी में लड़खड़ा कर गिर गया। स्थानीय नाविक व मछुआरों के सहयोग से शव को कड़ी मशक्कत के बाद बरामद किया गया। निवर्तमान विधायक मुन्ना यादव ने परिजनों को सांत्वना दी। पुलिस ने शव को पाेस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पत्नी केसरी देवी का रोते-रोते बुरा हाल है। सीओ रामजपी पासवान ने बताया कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतक के आश्रित को मुआवजा दिया जाएगा।

इधर, हरकामानशाही के मल्लाह टोली के राजेश सहनी की 10 वर्षीय पुत्री अस्मिता कुमारी उर्फ गगिया शौच जाने के क्रम में पैर फिसल जाने से बाढ़ के पानी में डूब गई। जिससे उसकी मौत हो गई। स्थानीय मुखिया रेणु सिंह के पति पूर्व मुखिया संजीत कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि परिजनों के द्वारा मोबाइल पर सूचना दी गई है।

तीन नए इलाकों में भी पानी घुसा

बाढ़ का पानी धीरे-धीरे अब नंदना, घोसौत व रघई पंचायत के कई गांवाें में फैल चुका है। पिपरा, नंदना व धारपुर गांव के 200 और रघई के 100 परिवार ऊंचे जगहाें पर शरण ले रखे हैं। पशुओं के चारे की समस्या से आजिज आ चुंके हैं। घोसौत पंचायत की मुखिया गुड़िया देवी ने बताया कि यहां पर बाढ़ से 2000 की आबादी संकट झेल रही है। अंचलाधिकारी रामजपी पासबान ने बताया कि शनिवार काे तीन नए निचले इलाकों रघई, बाड़ाभारती व घोसौत में भी बाढ़ का पानी घुस गया। बाढ़ के पानी से बर्बाद फसल की रिपाेर्ट प्रखंड कृषि पदाधिकारी से मांगी गई है।
सकरा में भी विकट होने लगी स्थिति

बूढ़ी गंडक में आई बाढ़ का पानी तिरहुत नहर की मरम्मत किए हुए बांध को पार करते हुए शनिवार की आधी रात सकरा के कई इलाकाें में प्रवेश कर गया। शाम साढ़े चार बजे नरसिंगपुर के लचका सड़क पर करीब 50 मीटर में एक से डेढ़ फीट पानी बहने लगा। स्थानीय नवीन कुमार मिश्रा, खुर्शीद आलम आदि ने बताया कि शुक्रवार की शाम तक इस सड़क पर पानी नहीं चढ़ा था। अब स्थिति विकट हाेती जा रही है। इधर, सकरा वाजिद, रघुनाथपुर दोनवां पंचायत के लोगों में एक बार फिर बाढ़ आने से बेचैनी बढ़ गई है।


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