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न लालच दें, न लोभ दें, बुनियादी सुधार ठोस दें… निश्चयों के दौर में इस भूजा वाले ने भी छेड़ी इन 6 सूत्रों पर नेता चुनने की मुहिम

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  • Bihar Patna Assembly Election 2020; Lal Mani Das, Know How This Man Creates Awareness About Voting

पटना6 मिनट पहले

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पटना के बाजार समिति के लालमणि दास भूजा बेचते हैं। चुनाव के समय ये वोटरों को सही नेता चुनने के लिए साइकिल से प्रचार भी करते हैं।

  • बाजार समिति के केला मंडी में भूजा बेचने वाले लालमणि दास वोटरों को कर रहे हैं जागरूक
  • सही नेता चुनने के लिए देते हैं छह सलाह, साइकिल से जब निकलते हैं तो लग जाती है भीड़

लालच दें, न लोभ दें, बुनियादी सुधार ठोस दें… अपने संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करेंगे- मतदान करेंगे, मतदान करेंगे…’ ये लाइनें आजकल बिहार की राजधानी पटना के लोगों को खासी लुभा रही हैं। ये हैं लालमणि दास जो, बाजार समिति की केला मंडी में भूजा बेचते हैं। अपनी दोपहिया सवारी पर पोस्टर बैनर टांग सुबह-सुबह निकल पड़ते हैं। मोहल्लों में प्रचार करते हैं। ये सब करने के बाद दोपहर बाद अपनी दुकान खोलते हैं। यह सब वो अपनी साइकिल से नापते हैं।

इस साइकिल पर कई बैनर लगे हैं, जिनमें मतदाताओं को सूझ-बूझ कर वोट देने की अपील की गई है। अनूठे प्रचार के कारण इनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि अब तो आस-पास के स्थानीय लोग इन्हें अपने मोहल्ले में प्रचार कराने के लिए बुलाने लगे हैं।

हम जनता के मन की बात कह रहे हैं…
बिहार चुनाव 2020 का यह भी एक नजारा है। लालमणि की साइकिल का पहिया तेजी से घूम रहा है। सब नेताओं के प्रचार में लगे हैं। लालमणि लोकतंत्र और संविधान बचाने के प्रचार करने में जुट गए हैं।हालत ये है कि संदेशों से सजी साइकिल पर सवार लालमणि जब घर से निकलते हैं तो आस-पास लोगों की भीड़ लग जाती है। इनके बैनर में वोटरों को सही नेता चुनने की छह सलाह भी दी गई हैं।
ये सलाह हैं-
1- जो हर मुकदमे का हर हाल में तीन साल में कर दे फैसला
2- जिनका चुनावी खर्चा हो सबसे कम
3- विधानसभा में अनावश्यक हंगामा नहीं करते हों
4- आम जनता की समस्याओं के लिए बहस में भाग लें
5- जो निष्ठावान और चरित्रवान हों
6- यदि उपरोक्त नहीं हो तो नोटा
उनके छह सूत्री पट्टे पर सवाल पूछा कि, एक और सलाह दे देते तो नीतीश जी के सात निश्चयों के साथ आप भी खड़े हो जाते। वे मुस्करा के बोलते हैं- कहां नीतीश जी, कहां हम। हम तो निश्चय नहीं अपने मन की बात कर रहे हैं। जो सब के मन की बात बन सके।

जेबखर्चे से प्रचार के बचाते हैं पैसे
कहते हैं, जब लोकतंत्र बेचने की तैयारी हो, इसे बचाने की मुहिम ज्यादा जरूरी है। लाल मणि दास भी कुछ ऐसा ही करने में लगे हैं। ये प्रचार किसी नेता के इशारे पर नहीं बल्कि एक जागरूक नागरिक होने के नाते कर रहे हैं। इसके लिए ना तो कोई उन्हें फंड देता है ना ही वह किसी पार्टी से ही जुड़े हैं। भूजा बेचकर जेबखर्च के लिए बचाए पैसों से वह प्रचार करते हैं। वह बताते हैं कि इससे मुझे सुकून मिलता है। जैसे कोई प्याऊ लगवा कर तो कोई गरीबों को खाना खिलाते हैं वैसे ही वोटरों को जागरूक करता हूं।

समस्या से निकला प्रचार का आइडिया
इसका आइडिया उन्हें पिछले नगर निगम चुनाव के दौरानआया। वह बताते हैं जैसे ही बारिश होती है पटना के विभिन्न इलाकों में भयंकर जलजमाव हो जाता है। लोगों की हालत इतनी खराब होती है कि लगातार पानी जमने से पैर में पकोही लग जाता है। नगर निगम के चुनाव के समय भी पटना का यही आलम था। जो वार्ड पार्षद थे उन्हें इससे कोई मतलब नहीं था। तब मैंने सोचा गलत लोग चुनकर ना आए इसलिए मैं लोगों को जागरूक करूंगा। तब से कर रहा हूं, लोकसभा चुनाव में भी प्रचार अभियान किया।


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