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पंचायतों में डोर टू डोर कचरा प्रबंधन की योजना अधर में लटकी, नहीं मिला लाभ

औरंगाबाद नगर22 मिनट पहले

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  • पंचायती राज व्यवस्था के तहत योजना काे संचालित करने का दिया था निर्देश
  • कचरा से जैविक खाद बनाने की थी योजना

नप की तरह ग्राम पंचायतों को भी साफ-सफाई रखने की योजना थी। डोर टू डोर कचरा प्रबंधन कराया जाना था। लेकिन यह योजना जिले में अधर में लटका पड़ा है। इसे शुरू कराने को लेकर अबतक पंचायत स्तर पर कोई पहल नहीं हुई है। एक दो पंचायतों में यह योजना शुरू भी हुई होगी तो इसकी कोई जानकारी नहीं है।

गांव में साफ-सफाई को प्राथमिकता देते हुए पिछले सात माह पूर्व ही पंचायत राज विभाग के द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर पंचायतों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों से कचरा उठाव के लिए पंचायती राज विभाग के मुख्य सचिव ने पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्राम कचहरी के न्याय मित्र व सचिव सहित विभागीय देख

रेेख में योजना काे संचालित करने का निर्देश दिया था। पंचायत स्तर पर भी कचरा संग्रहण की व्यवस्था को भी अपशिष्ट प्रबंधन के तहत वर्मी कंपोष्ट बनाया जा सके।

नालियों की साफ-सफाई के साथ-साथ ब्लीचिंग पाउडर का करना था छिड़काव

योजना के तहत ग्राम पंचायत में नालियों की नियमित सफाई करते हुए चूना या ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव की व्यवस्था की जानी थी। ताकि जल जमाव व गंदगी से मच्छरों का प्रकोप न बढ़े। लेकिन ऐसे नहीं हो सका हालांकि कोरोना काल के शुरूआती दौर में गांवों में पंचायत के द्वारा उच्च स्तर पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया।

लेकिन उसके बाद से अब तो कोई पूछने को भी तैयार नहीं है। पंचायत क्षेत्र के गांवों से होने वाले कचरा उठाव के बाद उसके प्रबंधन को लेकर की गई व्यवस्था को भी समीक्षा होनी थी। लेकिन यह योजना दिखावा बनकर फाईलों में ही रह गए। अब तो इसके बारे में कोई पूछने वाला भी नहीं।

योजना के तहत ग्राम पंचायतों की होनी थी रैकिंग

इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों की रैकिंग भी की जानी थी। स्वच्छता में अव्वल आने वाले पंचायतो कों पुरस्कृत किया जाना था। स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए कार्यों के आधार पर ही उनकी रैकिंग तय होनी थी। मानक के रूप में डोर टू डोर नियमित सफाई कचरा प्रबंधन व ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव कार्यों की समीक्षा की जानी थी।

लेकिन योजना शुरू ही नहीं हो सकी। योजना के अधर में लटकने की एक मुख्य वजह कोरोना भी है। क्योंकि मार्च माह में ही योजना को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई थी। पर उसी समय कोरोना का प्रकोप शुरू हो गया । जिसके कारण भी योजना अधर में लटकता चला गया। इधर अब विधानसभा चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लगा हुआ है। जिसके कारण कोई भी नया काम नहीं किया जा सकता है।


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