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‘पर्यावरण में स्थायित्व लाने के लिए हमें अपने उपभोग को करना होगा न्यूनतम, गांधी और शास्त्री के जीवन मूल्य करें आत्मसात’

मुंगेर16 घंटे पहले

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  • मुुंगेर विश्वविद्यालय में गांधी जयंती पर एनएसएस ने आयोजित किया वेबिनार व भाषण प्रतियोगिता

जल-जीवन-हरियाली से संबंधित संकट के समाधान के बिना विश्व शांति की कल्पना नहीं की जा सकती है। पृथ्वी का राजा मनुष्य है। पेड़-पौधे हमारी प्रजा हैं। उनके सरंक्षण का ख्याल रखना हमारा कर्तव्य है। पर्यावरण में स्थायित्व लाने के लिए हमें अपने उपभोग को न्यूनतम करना होगा। गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिन पर हमें उनके बताए गए जीवन मूल्यों को आत्मसात करना होगा। यह बातें शुक्रवार को गांधी जयंती पर आरडी एंड डीजे कॉलेज, राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से जल, जीवन, हरियाली विषय पर आयोजित वेबिनार में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कुलपति डाॅ. रंजीत कुमार वर्मा ने कही। प्रतिकुलपति प्रो. कुसुम कुमारी ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका भी उल्लेखनीय है। उन्होंने 1973 के चिपको आंदोलन व 1983 के अप्पिको आंदोलन में हरियाली के संरक्षण हेतु अहिंसा के मार्ग का उल्लेख किया। वेबिनार की अध्यक्षता डीजे कॉलेज के वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डा. एसके गुप्ता ने किया।

1973 के चिपको व 1983 के अप्पिको आंदोलन का महत्व बताया

गांधी जयंती काे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाते हुए एनएसएस, आरडी एंड डीजे कॉलेज ने आनलाइन भाषण प्रतियोगिता व वेबिनार किया गया। ऑनलाइन भाषण प्रतियोगिता का थीम जल-जीवन-हरियाली रखा गया था। इस कार्यक्रम के संयोजक एनएसएस अधिकारी प्रो. मुनिंद्र सिंह ने भाषण के विषय को स्पष्ट करते हुए बताया कि आज गांधी जी जीवित रहते तो जल-जीवन-हरियाली के संकट को दूर करने के लिए क्रांति करते। गांधी जी के तीन आधुनिक बंदर हैं -पहला जल का संरक्षण करो, दूसरा जीवन संकट का संरक्षण करो और तीसरा हरियाली का संरक्षण करो। सह संयोजक जंतु विज्ञान के विभागाध्यक्ष डाॅ. मयंक मधुकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। वाणिज्य विभाग के प्राध्यापक डाॅ. अनीश अहमद ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।


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