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बिहार भाजपा के कुछ कद्दावर नेता नहीं सुन रहे थे फडणवीस की बात, मजबूर होकर केंद्रीय नेतृत्व ने किया बिहार चुनाव प्रभारी बनाने का औपचारिक ऐलान

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  • Some Stalwart Leaders Of Bihar BJP Were Not Listening To Fadnavis, Forced The Central Leadership Made A Formal Announcement To Make Bihar Election In charge

पटना3 घंटे पहले

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देवेंद्र फडणवीस बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी बनाए गए हैं।

  • डेढ़ महीने पहले ही भाजपा ने की थी देवेंद्र को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाने की घोषणा
  • औपचारिक ऐलान के बाद अब बिहार में कद बढ़ने की संभावना, बिहार चुनाव का पूरा कामकाज देखेंगे

बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस अब औपचारिक रूप से बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी बन चुके हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि देवेंद्र फडणवीस के कामकाज संभालने के लगभग डेढ़ महीने बाद भाजपा को उनके चुनाव प्रभारी बनने की औपचारिक चिट्ठी जारी करनी पड़ी। खास बात यह रही की इस चिट्ठी के बारे में औपचारिक ऐलान खुद बिहार भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने मीडिया में किया। भूपेंद्र यादव ने कहा की बिहार चुनाव का पूरा कामकाज अब फडणवीस ही देखेंगे।

आखिर कौन था जो नहीं सुन रहा था देवेंद्र फडणवीस की बात
भाजपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि देवेंद्र फडणवीस को भले ही बिहार भाजपा का चुनाव प्रभारी बना दिया गया था, लेकिन पार्टी संगठन में मौजूद एक बड़े और कद्दावर नेता उनकी राय को तवज्जो नहीं दे रहे थे। यही नहीं इस बड़े नेता के संरक्षण में पार्टी के कई पदाधिकारी भी थे जो देवेंद्र फडणवीस को उनके कद के हिसाब से महत्व नहीं दे रहे थे।

यही वजह है की बिहार के दौरे से वापस लौटे देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय नेतृत्व को इससे जुड़ी जानकारी दी, जिसके बाद पार्टी की तरफ से यह औपचारिक चिट्ठी जारी की गई। यही नहीं, भूपेंद्र यादव ने मीडिया के जरिए यह बात बिहार में बैठे उन पदाधिकारियों तक पहुंचा दी जो अब तक देवेंद्र फडणवीस की बातों को संजीदगी से नहीं ले रहे थे।

संघ के करीबी माने जाते हैं देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस को संघ का काफी करीबी माना जाता है। यही वजह है कि 2 दिनों पहले बिहार दौरे पर आए देवेंद्र फडणवीस ने सबसे पहले संघ कार्यालय विजय निकेतन जाकर वहां करीब 2 घंटे तक बातचीत की और एनडीए में गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत की जानकारी दी। बिहार-झारखंड के संघ के प्रमुख प्रचारक राम दत्त से हुई इस मुलाकात में संघ की तरफ से बीजेपी को यह सलाह दी गई थी कि बीजेपी अपने गठबंधन दलों को लेकर ज्यादा उदार न बने और जो बीजेपी की परंपरागत सीटें नहीं हैं उनपर समझौता न किया जाए। संघ ने बीजेपी को गठबंधन दलों के सामने समझौतावादी न बनने की भी सलाह दी थी। माना यह जा रहा है कि इन्हीं बातों को लेकर देवेंद्र फडणवीस दिल्ली पहुंचे और उन्होंने आलाकमान को संघ की इस सलाह की जानकारी दी।

गठबंधन में सीटों के तालमेल पर भी अब फडणवीस करेंगे बात
चुनाव प्रभारी बनने के औपचारिक ऐलान के पहले भी देवेंद्र फडणवीस कई बार बिहार दौरे पर आ चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण बैठकों और कोर कमेटी की बैठकों में भी हिस्सा लिया, लेकिन अब इस पत्र के जारी होने के बाद वह सिर्फ इन बैठकों तक ही सीमित नहीं होंगे, बल्कि गठबंधन दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर जो बातचीत होगी उसमें भी शामिल होंगे।

निष्पक्ष छवि वाले नेता की तलाश थी
माना यह जा रहा है कि बिहार में जिस तरह से बीजेपी एक बार फिर से सीटों के तालमेल पर समझौतावादी दिख रही है, उससे संघ खुश नहीं है और ना ही बीजेपी के कार्यकर्ता। लिहाजा पार्टी की तरफ से एक ऐसे मजबूत नेता को दोनों घटक दलों के बीच बातचीत के लिए रखा गया है, जिसकी निष्पक्ष छवि हो। बिहार भाजपा के कई बड़े नेताओं पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी होने के आरोप लगते रहे हैं। लिहाजा अब इन नेताओं के अलावा बीजेपी इस बातचीत में एक निष्पक्ष नेता के तौर पर देवेंद्र फडणवीस को सामने रखना चाहती है।

माना यह जा रहा है की जेपी नड्डा बिहार भाजपा में फिर से ऐसे नेताओं को मजबूत करना चाहते हैं जो पहले लगातार काम करते रहे हैं। भूपेंद्र यादव के साथ देवेंद्र फडणवीस का मजबूत होना भी इसी बात की ओर इशारा करता है। असल में पार्टी का एक तबका बिहार भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव की कार्यशैली को लेकर नाराज दिखाई दे रहा था। पार्टी को ये अच्छी तरह मालूम था कि बिहार चुनाव में इस नाराजगी का असर दिखने वाला है। लिहाजा जातीय समीकरणों से लेकर पार्टी समीकरणों को देखते हुए यह बदलाव बीजेपी में सामने आ रहे हैं।


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