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भर्तियां, इंक्रीमेंट, सैटेलाइट लॉन्च टले, लेकिन नए संसद प्रोजेक्ट पर 25 हजार करोड़ खर्च किए जाएंगे

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नई दिल्ली15 मिनट पहले

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प्रस्तावित संसद भवन(फाइल फोटो)

  • विपक्ष ने कोरोना संकट के बीच खर्चीलेे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को रोकने को कहा है
  • केंद्र सरकार ने राज्यों को जीएसटी के 2.35 लाख करोड़ रुपए भी नहीं दिए हैं
  • पैसों की कमी के कारण कई मंत्रालयों के बजट में 40 फीसदी तक कटौती

देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। आम आदमी से लेकर केंद्र सरकार तक के पास पैसों की कमी है। केंद्र ने राज्यों को जीएसटी के 2.35 लाख करोड़ रुपए नहीं दिए हैं। बावजूद इसके केंद्र सरकार नए संसद भवन निर्माण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। सेंट्रल विस्टा नाम से चल रहे प्रोजेक्ट के लिए 25 हजार करोड़ का बजट भी है और इसमें बन रही पार्लियामेंट बिल्डिंग के लिए 861 करोड़ के खर्च पर बहुत तेजी से काम चल रहा है।

विपक्ष ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को कोरोना काल में रोकने की मांग की। लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी के अनुसार विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है। बलूनी बताते हैं कि देश के किसी भी प्रोजेक्ट को रोका नहीं गया है। सभी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। विपक्ष अपने कर्तव्य का निर्वहन ही नहीं कर पा रहा है। उसे पता ही नहीं है कि देश कितनी तरक्की कर रहा है, विकास कार्य कितनी तेजी से चल रहे हैं।

सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हुए

ऑल इंडिया सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के नेशनल जनरल सेकेट्री पीएस नायर कहते हैं कि सीआरपीएफ की दिल्ली सहित कई बिल्डिंग जर्जर हो रही हैं, लेकिन कोई उसे नहीं बनाना चाहता। फोर्स को रिटायर होने के समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। सभी नौकरियों पर रोक लगा दी गई। रिटायर होने वाले एक्स सर्विसमैन को कोई जॉब नहीं मिल रहा है और सरकार ने हमारा डीए भी रोक लिया है। जबकि सेंट्रल विस्टा बनाने के लिए रुपया है। क्या संसद भवन जर्जर होकर बैठने लायक नहीं बचा है।

सरकार ने 8 अप्रैल 2020 और 23 जून 2020 के आदेश में केवल 17 मंत्रालयों को छोड़कर बाकी सभी मंत्रालयों के खर्च बजट में 40 फीसदी तक कटौती करने को कहा। यह कटौती शुरुआती सितंबर तक होनी थी, लेकिन अब भी जारी है।

वहीं वित्त विभाग, भारत सरकार के

डीजी मीडिया एंड कम्यूनिकेशन, राजेश मल्होत्रा ने कहा कि सभी विभागों को गैरजरूरी खर्चों में कटौती के लिए कहा गया है। जो पूर्व से स्वीकृत कार्य हैं उन्हें संबंधित विभाग प्राथमिकता के आधार पर करें। स्वीकृत बजट नहीं रोका गया है। केंद्र की ओर से राज्यों को दिया जाने वाला शत प्रतिशत बजट दिया गया है। शेष|पेज 9 पर

इस तरह रुके हैं दूसरे कई जरूरी काम

राज्य मांग रहे हैं पैसा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, दिल्ली के केजरीवाल, तमिलनाडु के ई. के. पलानीस्वामी ने प्रधानमंत्री को और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखकर दो टूक कहा है कि उन्हें पैसे चाहिए। केंद्र के पास राज्यों का 2.35 लाख करोड़ रुपए बकाया है, जो उसे राज्यों को जीएसटी नुकसान की भरपाई के रूप में देना है।

महंगाई भत्ते पर भी रोक

कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर 1 जनवरी 2020 से 1 जुलाई 2021 तक रोक है। इससे केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों तथा 61 लाख पेंशनभोगियों पर असर पड़ा। ऑल इंडिया सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के नेशनल जनरल सेकेट्री पीएस नायर का कहना है कि इस फैसले का असर 20 लाख सेवारत एवं सेवानिवृत्त परिवारों पर पड़ेगा।


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