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भारत, जापान समेत 22 देशों में 58% लड़कियां ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार; सेफ रहने के लिए 5 बातों का ध्यान रखें

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  • 58% Of Girls In 22 Countries Of The World Suffer From Online Harassment; Learn All The Ways To Deal With It, Including The Report Section And Privacy Settings.

नई दिल्ली14 मिनट पहलेलेखक: आदित्य सिंह

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  • 47% महिलाओं को इंटरनेट पर यौन हिंसा की धमकी मिल रही, 23% लड़कियां अपने कॉलेज और ऑफिस के लोगों से परेशान
  • आपत्तिजनक लोगों को ब्लॉक करें, ज्यादा परेशान करने वालों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करें

दुनिया में साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग करने की तमाम खबरें हर रोज सामने आती हैं। इसी साल मई में गुरुग्राम की एक लड़की की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की बात कही गई। पोस्ट वायरल होने पर लड़की ने 11वीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।

आज यानी 11अक्टूबर को दुनिया अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ गर्ल चाइल्ड) मना रही है। लेकिन हाल ही में हुए एक ग्लोबल सर्वे के मुताबिक, दुनिया के 22 देशों की 58% लड़कियां ऑनलाइन उत्पीड़न और अपशब्द का सामना कर रही हैं।

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ललित मिश्रा के मुताबिक, सोशल मीडिया के प्राइवेसी सेटिंग के जरिये ऑनलाइन उत्पीड़न से बचा जा सकता है। मिश्रा बताते हैं कि जो भी सोशल मीडिया हम इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी सेटिंग्स से हमें अपडेट रहना चाहिए। हम सेटिंग के जरिये मैसेज और कमेंट करने वाले को सिलेक्ट कर सकते हैं।

ललित मिश्रा के मुताबिक, सोशल मीडिया और ईमेल के सभी प्लेटफॉर्म जिसका आप इस्तेमाल करते हैं, उसकी प्राइवेसी एवं सेफ्टी सेटिंग से अपने आपको अपडेट रखें। सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी सेटिंग की जा सकती है कि आपके मैसेज कौन देख सकता है या आपको मैसेज कौन भेज सकता है। आए हुए मैसेज को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अप्रूव करने के ऑप्शन दिए गए हैं, आप गलत यूजर का मैसेज अप्रूव न करें।

ऑनलाइन उत्पीड़न से कैसे बचा जा सकता है ?

  • एक समस्या यूट्यूब के साथ है, जिसमे शैक्षिक विषयों के वीडियो का हवाला देकर अश्लील वीडियो अपलोड किया जा सकता है। इसके रोकने के लिए यूट्यूब को एआई (आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस) तकनीक का सहारा लेना चाहिये। एआई लिखी गई भाषा पहचान कर उसे पढ़ सकता है।

ऑनलाइन उत्पीड़न की कहां करें शिकायत?

  • मिश्रा बताते हैं कि आईटी एक्ट के सेक्शन 67A और 67B के तहत आपत्तिजनक लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कराया जा सकता है। ट्रोलिंग से बचने के लिए संयम और सावधानी दोनों का परिचय देना चाहिए।
  • इसके बावजूद अगर एब्यूज और ब्लैकमेल किया जा रहा है या धमकी दी जा रही है तो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह भारत सरकार का एक पोर्टल है जो इस तरह के अपराधों के नियंत्रण के लिए बनाया गया है।

ऑनलाइन उत्पीड़न से होने वाले तनाव से बचने के लिए 5 बातों पर ध्यान दें

  1. आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वालों को इग्नोर करें।
  2. किसी भी कमेंट पर तत्काल रिएक्ट न करें।
  3. लगातार परेशान कर रहे लोगों को ब्लॉक और रिपोर्ट करें।
  4. एब्यूजिंग एकाउंट के खिलाफ शिकायत करें, ऐसे एकाउंट सस्पेंड हो सकते हैं।
  5. अपने सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग को चेक करें।

महिलाओं को यौन हिंसा की दी जा रही है धमकी

  • स्टेट ऑफ द व्लर्ड गर्ल्स रिपोर्ट सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, भारत, ब्राजील, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, थाइलैंड और अमेरिका समेत 22 देशों की 58% लड़कियों ने बताया कि वे सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, वॉट्सऐप और टिकटॉक) पर अभद्र व्यवहार और अपशब्द का सामना करती हैं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक 47% महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें शारीरिक और यौन हिंसा की धमकी दी जा रही है। 59% महिलाएं ऐसी हैं, जो अपशब्द और अपमानजनक भाषा का सामना कर रही हैं। एलजीबीटी समुदाय की महिलाओं का कहना है कि उनकी आइडेंटिटी की वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

अजनबियों से ज्यादा परेशान हैं महिलाएं

  • सर्वे में पाया गया कि उत्पीड़न करने वाले लोगों में जानने वाले कम और अजनबी ज्यादा हैं। 11% लड़कियों का ऑनलाइन उत्पीड़न उनके प्रजेंट और एक्स पार्टनर कर रहे हैं। उनके साथ जबरदस्ती की जा रही है, बातों को न मानने पर गालियां और धमकियां दी जा रही हैं।
  • 21% लड़कियां अपने दोस्तों से उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। 23% लड़कियों का ऑनलाइन उत्पीड़न उनके कॉलेज और ऑफिस के लोग कर रह हैं। उत्पीड़न करने वालों में 36% अंजान लोग हैं।

ऑनलाइन उत्पीड़न से बढ़ रहा महिलाओं में तनाव

सर्वे में पाया गया कि ओवरऑल 32% महिलाओं का उत्पीड़न फेक आईडी से किया जा रहा है। जिसके चलते 42% महिलाएं तनाव का सामना कर रही हैं। यही कारण है कि इन 22 देशों में औसतन हर 5 में से 1 लड़की ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली है। यही नहीं, हर 10 में से 1 लड़की ने सोशल मीडिया पर खुद का विचार रखना कम कर दिया है।


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