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मातृत्व अवकाश पर गईं और अशक्त महिलाओं की भी लग गई चुनाव में ड्यूटी, ट्रेनिंग के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही हैं धज्जियां

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पटनाएक दिन पहले

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पटना जिले में 277 महिला बूथ बनाए गए हैं जहां पर महिलाकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।

  • स्कूल में महिलाओं को चुनाव कराने की ट्रेनिंग दी जा रही है
  • पटना जिले में 277 महिला बूथों पर 1108 महिला मतदानकर्मियों की होगी तैनाती

(प्रीति सिंह/श्रेया शर्मा) समय- दोपहर के डेढ़ बजे…. जगह- राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय गर्दनीबाग… स्कूल के गेट के अंदर एक-एक कर जाती महिलाएं… तैनात कर्मी हर किसी का टेम्परेचर लेता है। एक अन्य कर्मी सैनेटाइजर देता है। अंदर जगह-जगह महिलाओं की भीड़ लगी हुई है। सोशल डिस्टेंसिंग का कहीं कोई नामो-निशान नहीं है।

स्कूल में महिलाओं को चुनाव कराने की ट्रेनिंग दी जा रही है। अधिकतर शिक्षिकाएं हैं। कुछ बैंक तो कुछ समाज कल्याण विभाग की कर्मी भी हैं। इन्हें चुनाव के दौरान भूमिका निभानी है। दो शिफ्टों में दी जा रही ट्रेनिंग 11 अक्टूबर तक चलेगी। एक शिफ्ट में 450 महिलाएं हैं।

ट्रेनिंग उन्हें भी दी जा रही है जो चलने-फिरने में मजबूर हैं अथवा मातृत्व अवकाश पर थीं। कुछ महिलाएं तो 55 साल से ज्यादा की हैं और उनमें कई चलने-फिरने में लाचार हैं। मातृत्व अवकाश से ट्रेनिंग के लिए बुलाई गईं महिलाओं की समस्या न ही स्कूल सुन रहा है ना ही अधिकारी।

पटना जिले में 277 महिला बूथों पर 1108 महिला मतदानकर्मियों की होगी तैनाती

पटना जिले में 277 महिला बूथ बनाए गए हैं जहां पर महिलाकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इन बूथों पर 1108 महिला मतदानकर्मी की तैनाती की जाएगी। वहीं बिहार विधानसभा चुनाव के 14 विधानसभा क्षेत्रों के 7034 मतदान केंद्रों पर कुल 12,837 महिलाकर्मियों की तैनाती होगी। जिसमें 3330 महिलाकर्मी शहरी बूथों पर तथा 3611 ग्रामीण बूथों पर प्रतिनियुक्त होंगी।
ईवीएम हैंडल करने की दी जाती है जानकारी
ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं को ईवीएम हैंडल करने की जानकारी दी जा रही है। मास्टर ट्रेनर डॉ. पूनम कुमारी कहती हैं हम इन्हें ईवीएम को ऑन तथा ऑफ करना सिखाते हैं। साथ ही पोलिंग ऑफिसर वन, पोलिंग ऑफिसर टू तथा पोलिंग ऑफिसर थ्री की भूमिका के बारे में भी विस्तार से समझा रहे हैं।
चुनावी ड्यूटी को लेकर उत्साहित हैं युवा महिलाकर्मी
मतदानकर्मी की भूमिका को लेकर युवतियां अधिक उत्साहित दिखीं। कहती हैं सरकारी कर्मी हैं तो अपनी ड्यूटी तो निभानी ही होगी। हालांकि दूर-दराजों के गांवों में चुनाव कराने को लेकर वो संशकित नजर आईं। चुनाव के दौरान पिकअप की सुविधा नहीं मिलने तथा शौचालय की असुविधा से परेशान दिखीं।
केस- 1: बच्ची को लेकर भटक रहीं हैं रश्मि सिंह
रश्मि सिंह, केंद्रीय विद्यालय दानापुर कैंट में कार्यरत हैं। मातृत्व अवकाश पर थी। ट्रेनिंग के बुलाई गई हैं। गोद में दो महीने के बच्चे को लेकर वो इधर-उधर भटकती रहीं। बच्चा सिर्फ दो महीने का है। बच्चे को लेकर ड्यूटी और ट्रेनिंग करना संभव नहीं है। मौजूदा नोडल ऑफिसर समस्या सुन कहती हैं कि मेरे हाथ में कुछ नहीं है। आप जाकर ट्रेनिंग कर लें।

केस- 2: गठिया से ग्रसित यास्मीन चल नहीं सकतीं
मोकामा प्रखंड से आई यास्मीन खातून के पैर मुड़े हुए हैं। उन्हें गठिया है। चलने और बैठने में तकलीफ होती है। उम्र करीब 50 वर्ष है। कहती हैं कई अधिकारियों को अर्जी दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसी तरह ट्रेनिंग करने के लिए आ पाई हैं। वह चुनावी ड्यूटी करने में सक्षम नहीं है। लेकिन नोडल अफसर ने उन्हें ट्रेनिंग करने और अटेंडेंस बनाने के लिए कहा है।


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