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मॉर्निंग वाॅक के दौरान भाजपा नेता की गाेली मारकर हत्या, मारने के बाद किसी कागज पर अंगूठा का निशान भी लिया

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पटना27 मिनट पहले

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भाजपा नेता राजू बाबा के अंगूठे पर लगी स्याही

  • राजू बाबा के अंगूठे का निशान लेकर अपराधियाें ने कहीं पुलिसिया जांच काे भटकाने की काेशिश ताे नहीं की
  • रेकी करने के बाद हुई हत्या, किसी नजदीकी का हाथ हाेने का शक, काॅन्ट्रैक्ट किलर की मदद से वारदात को अंजाम दिया

भाजपा जयंत मंडल, पटना महानगर के उपाध्यक्ष राजेश कुमार झा उर्फ राजू बाबा की अपराधियाें ने गाेली मारकर हत्या कर दी। वह जमीन का काराेबार भी करते थे। करीब 44 साल के राजू की हत्या बेउर थाने के तेज प्रतापनगर स्थित सीताराम मैरेज हाॅल के पास गुरुवार की सुबह छह बजे उस वक्त हुई जब वह माॅर्निंग वाक करने के लिए घर से निकले थे।

दाे नकाबपाेश अपराधियाें ने उन्हें मैरेज हाॅल के पास राेक लिया। एक ने उन्हें पकड़ा और दूसरे ने कनपट्टी में गाेली मार दी और बाइक से फरार हाे गए। हत्या करने के बाद अपराधियाें ने राजू बाबा का किसी कागज पर अंगूठा का निशान भी ले लिया। सीसीटीवी कैमरे में दो बदमाश की तस्वीर कैद हुई है। राजू बाबा ने तेजप्रतापनगर में आलीशान मकान बनाया है।

जमीन विवाद के एक केस में वह पिछले साल 15 दिन तक जेल में रहे थे। राजू के भाई जितेंद्र झा के बयान पर अज्ञात पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने दाे संदिग्धाें काे हिरासत में लिया है। सिटी एसपी वेस्ट अशाेक मिश्रा ने बताया कि घटना के पीछे जमीन विवाद या पारिवारिक विवाद हाे सकता है। राजनीतिक विवाद नहीं है।

अंगूठे का निशान लेने के क्या मतलब?

हत्या करने के बाद राजू बाबा के अंगूठे का निशान लिया गया है। राजू बाबा बीए पास थे। फिर उनके अंगूठे का निशान लेने के क्या मतलब? कहीं ऐसा ताे नहीं कि जिसके इशारे पर उनकी हत्या हुई या जिसने गाेली मारी, उसने पुलिसिया जांच काे भटकाने की काेशिश की? या फिर ऐसा भी हाे सकता है कि काेई जमीन के कागज का पेपर हाेगा, जिस पर राजू बाबा साइन करने से इनकार कर रहे हाें।

बहरहाल, यह ताे अपराधियाें की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा। जिस तरह से उनकी हत्या की गई, उससे साफ है कि अपराधियाें काे पता था कि सुबह वह टहलने के लिए कहां जाते हैं? किस वक्त घर से निकलते हैं? सुबह छह बजे हत्या इसी ओर इशारा कर रहा है। उनकी हत्या में कांट्रेक्ट किलर के हाेने की भी बात सामने आई है।

सूत्राें के अनुसार, राजू बाबा की हत्या में किसी करीबी या परिचित का हाथ हाे सकता है। राजू बाबा सुबह में माेबाइल लेकर टहलने के लिए निकले थे। पुलिस ने उनका माेबाइल अपने कब्जे में कर लिया है। उनके माेबाइल का सीडीआर पुलिस खंगालने में जुटी है। राजू बाबा की हत्या की सूचना मिलने के बाद दीघा से भाजपा विधायक संजीव चाैरसिया भी उनके घर पहुंचे और पीड़ित परिजनाें काे सांत्वना दी।
लाॅकडाउन में गरीबाें काे बांटा अनाज, 28 काे लगाया था रक्तदान शिविर
राजू बाबा समाजसेवी थे। वह हर किसी की मदद करते थे। जाे भी उनके पास आता, उनका काम करवा देते थे। लाॅकडाउन के दाैरान उन्हाेंने गरीबाें व जरूरतमंदाें काे अनाज, पैसे आदि बांटे थे। यह सिलसिला महीनाें तक चलता रहा। राजू बाबा कहा करते थे, पैसा ताे कमा लिया अब पुण्य का काम करना है।

गरीबाें की मदद करना सबसे बड़ा पुण्य है। 28 सितंबर काे ही राजू बाबा ने अपने घर पर रक्तदान शिविर लगाया था। 2 अक्टूबर गांधीजी की जयंती पर वे गरीबाें के बीच कपड़ा बांटने वाले थे, पर इससे पहले ही उनकी हत्या हाे गई। उनकी हत्या से तेजप्रतापनगर में गम का माहाैल है।

हत्या की खबर सुन पत्नी बेसुध, जुड़वा बेटियाें का भी बुरा हाल
राजू बाबा जब घर से टहलने काे निकले थे, तब पत्नी अर्चना झा व उनकी जुड़वां बेटियां गुनगुन व मुनमुन साेई हुई थीं। अर्चना अभी नींद से जगी ही थी कि उन्हें पति की हत्या की खबर मिली। पहले ताे उन्हें यकीन नहीं हुआ, पर बाद में हकीकत का पता चल गया। उसके बाद वह दहाड़ मारकर राेने लगीं। तीन साल की दाेनाें बेटियां केवल देख रही थीं। उन्हें यह पता नहीं था कि पिता का साया उनके सिर से उठ गया।
नहीं पहुंचे एसपी-डीएसपी, भाई ने की न्यायिक जांच की मांग
सुबह छह बजे राजू बाबा की हत्या हुई। चाैंकाने वाली बात यह है कि थानेदार ताे शव लेकर पीएमसीएच चले गए, पर माैके वारदात पर न एसपी वेस्ट पहुंचे और न ही फुलवारीशरीफ डीएसपी। यह अच्छी बात रही कि सड़क जाम, हंगामा या किसी तरह के विधि व्यवस्था की समस्या नहीं हुई। भले ही आईजी अपने मातहत अधिकारियाें काे यह आदेश देते रहे कि बड़ी वारदात हाेने पर एसपी व डीएसपी भी माैके पर पहुंचें, पर इसका काेई असर नहीं है।

इधर, राजू बाबा के भाई जितेंद्र झा ने भी कहा कि सत्तापक्ष के नेता की हत्या हाे गई और घटना के बाद न एसपी आए, न ही डीएसपी। हत्या की न्यायिक जांच हाे, ताकि यह साफ हाे जाए कि उनकी हत्या की वजह क्या थी और किसने की? तभी इस मामले का पूरा सच सामने आ सकेगा। जितेंद्र ने बताया कि पूरा परिवार घर में ताला बंदकर गांव चला गया है।
पत्नी का शक: किसी ने फोन कर बुलाया होगा, मामले की जांच कराई जाए

भाजपा नेता राजू बाबा की पत्नी अर्चना झा ने कहा कि वे सुबह साढ़े पांच बजे घर से निकले। खुद से गर्म पानी कर वे टहलने के लिए निकले थे। अर्चना का शक है कि किसी ने उन्हें देर रात फाेन किया हाेगा या फिर तड़के सुबह फाेन कर बुलाया हाेगा। जमीन विवाद में उनकी हत्या हुई है।

दाे-तीन पहले घर पर कुछ लाेग आए थे। जमीन काे लेकर ही कुछ बातचीत हुई थी। वे लाेग काैन थे, मुझे नहीं मालूम है। अर्चना ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। कहा- जाे भी चल व अचल संपत्ति है, वह पति के ही नाम से है।

डेढ़ माह में बेउर थाना क्षेत्र में यह दूसरी बड़ी घटना
डेढ़ माह में बेउर थाना इलाके में यह दूसरी बड़ी घटना है। जमीन विवाद में 23 अगस्त काे ही बेउर के महावीरनगर में तीन बाइक पर सवार छह शूटराें ने प्राेपर्टी डीलर टुनटुन गाेप के दफ्तर में घुसकर कारबाइन व अाधुनिक पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग कर जमीन काराेबारी राजेश की हत्या कर दी थी। इस घटना में चार अन्य लाेग घायल हुए थे। इसमें पुलिस अबतक किसी काे गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

करीबी बोले: एक माह पहले पैसों के विवाद में साले ने दी थी धमकी

राजू बाबा के एक करीबी के अनुसार उनके साला चंदन कुमार ने उन्हें जमीन खरीदने के लिए 15 लाख रुपए दिए थे। इस पैसे को लेकर करीब एक-डेढ़ माह पहले साला-बहनोई के बीच विवाद हुआ था। चंदन ने राजू बाबा को देख लेने की धमकी दी थी। राजू बाबा मूल रूप से सीतामढ़ी के खड़गा बसंत गांव के रहने वाले थे। वे सीतराम झा के चार बेटाें में सबसे छाेटे थे।

बड़े प्राेपर्टी डीलर के साथ ही समाजसेवी भी थे। उन्हाेंने तेजप्रतापनगर में आलीशान मकान भी बनाया है। राजू बाबा के बड़े भाई विपिन झा झारखंड में एएसआई हैं, जबकि दूसरे भाई साईचक में रहकर टेंपो चलवाते हैं। एक भाई जितेन्द्र कुमार झा हम पार्टी के सीतामढ़ी जिलाध्यक्ष हैं। राजू बाबा ने 2006 में पहले से शादीशुदा और दाे बेटे की मां अर्चना झा से प्रेम विवाह किया था।

अर्चना से गुनगुन और मुनमुन दो बेटियां हैं। वहीं अर्चना काे पहले पति बेगूसराय निवासी बस कंडक्टर सुमन कुमार से दाे बेटा आशीष और किशन है, जाे दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई का खर्च राजू बाबा उठाते थे। पाेस्टमार्टम के बाद राज बाबू का शव पैतृक गांव ले जाया गया।


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