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रामविलास के पार्थिव शरीर को हाजीपुर ले जाना चाहते थे समर्थक, रोकने चीख-चीख कर रोने लगे, लगाते रहे गुहार

पटना17 मिनट पहले

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रामविलास पासवान के पार्थिव शरीर को हाजीपुर ले जाने की मांग को लेकर रोते उनके समर्थक।

  • रामविलास पासवान का हाजीपुर से ऐसा लगाव रहा है कि हाजीपुर ने उन्हें गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का तगमा दिया

रामविलास पासवान के पार्थिव शरीर को हाजीपुर ले जाने के लिए सैकड़ों की संख्या में हाजीपुर के लोग पटना के एसके पुरी पहुंचे। लोग पार्थिव शरीर को हाजीपुर ले जाना चाहते थे। रोकने पर चीख-चीख कर रोने लगे और गुहार लगाने लगे।

रामविलास के पार्थिव शरीर को लोग यूं ही अपने क्षेत्र में नहीं ले जाना चाहते थे। वजह यह है कि रामविलास पासवान का हाजीपुर से ऐसा लगाव रहा है कि हाजीपुर ने उन्हें गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का तगमा दिया है। तभी तो रामविलास पासवान कहते थे कि हाजीपुर मेरी मां है। आज हाजीपुर की जनता इसलिए भी इस जिद पर अड़ी है। क्योंकि रामविलास पासवान ने हाजीपुर में बिना जात-धर्म देखे लोगों की खूब सहायता की। आज रामविलास पासवान की वजह से कई परिवार समृद्ध हो गए हैं।

रामविलास पासवान का कद हाजीपुर में उनकी पार्टी लोजपा से कहीं ज्यादा बड़ा था। हाजीपुर मतलब रामविलास और रामविलास मतलब हाजीपुर। रामविलास पासवान ने हाजीपुर में विकास के काम किया तो हाजीपुर की जनता ने उन्हें हर बार जीता कर रिकॉर्ड मतों से संसद में भेजती रही। रामविलास पासवान ने 1977 में हाजीपुर जीत का सिलसिला शुरू किया था, दो बार को छोड़ दें तो हर बार जीत हासिल की है। भले हाजीपुर में 6 विधानसभा क्षेत्र हो। पांच पर अलग-अलग पार्टियों के विधायक हैं। मात्र एक विधानसभा लालगंज में एलजेपी के विधायक हैं फिर भी लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान का जादू हाजीपुर पर ऐसा चलता था कि दूसरी पार्टियां बड़े अंतर से हार जाती थीं।

पटना के एसके पुरी स्थित रामविलास पासवान के आवास पर रोते-बिलखते उनके समर्थक।

पटना के एसके पुरी स्थित रामविलास पासवान के आवास पर रोते-बिलखते उनके समर्थक।

रामविलास पासवान अंतिम बार 2014 में हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव लड़े थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में रामविलास को कुल चार लाख 54 हजार वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के संजीव प्रसाद टोनी को 2 लाख 29 हजार और जदयू के रामसुंदर दास को 95 हजार 700 वोट मिले थे।

रामविलास पासवान 1969 में पहली बार विधायक चुने गए। 1977 में हाजीपुर से पहली बार लोकसभा पहुंचे। उसके बाद हाजीपुर से 8 बार सांसद रहे थे । 1984 और 2009 में वह हारे भी थे फिर भी उन्होंने हाजीपुर को नहीं छोड़ा। यही वजह है कि उन्होंने फिर से जनता के दिल में जगह बना ली थी। आज भी हाजीपुर से उनके भाई पशुपति पारस सांसद हैं। रामविलास पासवान तीन दशक तक केंद्र में मंत्री रहे थे। इस दौरान उन्हें छह प्रधानमंत्री के साथ काम किया।


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