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विधानसभा चुनाव में फिर से गरमाने लगा टोपोलैंड का मुद्दा, प्रत्याशियों से प्रश्न कर रही क्षेत्र की जनता

बड़हराएक दिन पहले

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  • बड़हरा के लोग टोपोलैंड को लेकर कई बार कर चुके हैं आंदोलन, पर नहीं हुई कार्रवाई

बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ चुका है। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी गांवों में लोगों से संपर्क में जुटने लगे हैं। 28 अक्टूबर को मतदान है। लेकिन बड़हरा की सबसे बड़ी समस्या टोपोलैंड की है। ऐसा नहीं कि इस समस्या के निदान के लिए आंदोलन नहीं हुआ।

क्षेत्र के किसान लगातार टोपोलैंड की समस्या को प्रखंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक उठाते रहे हैं। यहां तक कि इस समस्या को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक भी पहुंचाई। किसानों ने विधायक, पूर्व विधायकाें और मंत्री तक से मिलकर इसकी ओर ध्यान आकृष्ट कराया। लेकिन किसानो के हित में फिलहाल कोई कार्य किसानो को नहीं दिख रहा है। बड़हरा कृषि आधारित क्षेत्र है। जीविका का आधार कृषि है।

इनकी जमीन दियारे क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। जो कि पुश्तैनी है। इस जमीन को सरकार ने सर्वे नही कराया। इसे अनसर्वे जमीन कह टोपोलैंड घोषित कर दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि टोपोलैंड की जमीन करीब 20 हजार बीघा के आसपास है। जिसे सरकार ने टोपोलैंड घोषित कर दिया है।

इस दयारे की जमीन में करीब 20 गांव के लोगों का हित जुड़ा हुआ है। इसी जमीन पर खेती कर अन्न उत्पादन कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। इसके लिए विधानसभा चुनाव में किसान हित की बात लोग विभिन्न प्रत्याशियों के समक्ष उठाने लगे हैं। किसानों द्वारा प्रत्याशियों से प्रश्न भी पूछे जा रहे हैं।
टोपोलैंड घोषित होते ही बड़हरा में आंदोलन शुरु

सारण समाहरणालय, छपरा से 14 जुलाई 2018 को एडीएम ने पत्र निकालकर टोपोलैंड घोषित किया। बड़हरा के विभिन्न गांवो के किसानो के होश उड़ गये। धीरे धीरे किसान एकत्रित होने लगे। क्षेत्र के किसान एक संगठन बनाया। जिसमें किसानो ने जन संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन का मूर्त रुप दिया जाने लगा। किसान गांव गांव में जाकर सरकार की टोपोलैंड नीति को विस्तार से रखे। दर्जनो बार किसानो ने एडीएम छपरा, सीओ बड़हरा, डीएम भोजपुर व अन्य से समस्या का निदान निकालने का गुहार लगाने लगे। लेकिन उसका आज तक समाधान नही निकल सका।
वर्ष 2017 तक किसानो ने जमीन का खरीद बिक्री व लगान रसीद कटवाया

प्रख़ड के ज्ञानपुर सेमरिया, बखोरापुर अन्य गांव के किसानों ने बताया कि सरकार ने 5 जून 2017 तक लगान, रसीद, दाखिल खारिज भी हुआ। अचानक सरकार ने किसानो के खिलाफ फैसला लिया। जिससे किसानो की पुश्तैनी जमीन की रसीद, खरीद बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गयी। सेमरिया गांव के किसान कन्हैया सिंह, दयावंती देवी, राजझड़ी देवी, आकाशो कुंवर व अन्य ने इसी तारीख में कटा रसीद दिखाया। वही बखोरापुर व सेमरिया गांव के किसानो ने 16 जून 2017 तक जमीन के खरीद बिक्री के दस्तावेज भी दिखा रहे थे।


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