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विरासत की राजनीति किसी काे रास आई तो किसी ने हमेशा के लिए कर ली तौबा

बिहार चुनाव19 घंटे पहले

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लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के पुत्र तेजस्वी-तेजप्रताप भी चुनाव के केंद्र में रहेंगे।

  • सात पूर्व मुख्यमंत्रियों के एक भी परिजन अब राजनीति जगत में सक्रिय नहीं
  • इस बार रहेगी मौजूदगी: परिवारवाद, वंशवाद व क्षेत्रवाद के जुमले परवान चढ़ेंगे

राजनीति में परिवारवाद गरम बहस है। क्षेत्रीय दल इसकी सीधी जद में हैं। राजद-कांग्रेस पर सत्तापक्ष के हमले का प्रमुख एजेंडा ही परिवारवाद है। लेकिन यह तस्वीर का एक पहलू है। दूसरा पहलू यह है कि राज्य के सात पूर्व मुख्यमंत्रियों के एक भी परिजन राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। तीन के परिजनों ने कुछ दिनों तक राजनीति की पिच पर जमे रहने की कोशिश भी की। लेकिन पारी लंबी खिंचती नहीं देख संन्यास लेना ही बेहतर समझा।

सूबे के पहले मुख्यमंत्री और बिहार केसरी के नाम से प्रसिद्ध डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने अपने जीवन में कभी परिवार के लोगों को राजनीति में आगे लाने का प्रयास ही नहीं किया। एक और पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भोला पासवान शास्त्री ने बेटे या परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए कभी टिकट का बंदोबस्त किया हो इसका उदाहरण भी नहीं मिलता। लेकिन आज स्थितियां उलट हैं।

वर्तमान में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिजन ही सियासत में सक्रिय

तीन पूर्व सीएम के परिजन वर्तमान में राजनीतिक रूप से सक्रिय है। दारोगा प्रसाद राय के पुत्र चंद्रिका राय, डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्रा और लालू-राबड़ी परिवार तो है ही। पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिंह के पुत्र निखिल कुमार और भागवत झा आजाद के पुत्र कीर्ति झा आजाद लोकसभा चुनाव लड़ते रहे हैं। हालात बता रहे कि विधानसभा चुनाव में इस बार राजनीति में परिवारवाद, वंशवाद, क्षेत्रवाद और जातिवाद सरीखे जुमले और परवान चढ़ेंगे।

इस बार ज्यादा नजर आएंगे सियासी पृष्ठभूमि के नेता

हाशिए पर खिसके, पॉलिटिकल रिटायरमेंट की कगार पर खड़े मंत्रियों, विधायकों में शायद ही कोई चर्चित नेता हो जिसके परिजन इस बार दंगल में भाग्य आजमाते न दिखें। वजह साफ है क्योंकि नजीर सामने है और हर दल में है। 2020 के चुनाव में राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं की संख्या सर्वाधिक होगी।

ये हैं सात पूर्व सीएम जिनका परिवार अब राजनीति में सक्रिय नहीं

दीप नारायण सिंह, केबी सहाय, महामाया प्रसाद सिन्हा, भोला पासवान शास्त्री, केदार पांडेय, चंद्रशेखर सिंह, हरिहर प्रसाद सिंह

2015 में इन नेताओं के परिजन थे चुनावी मैदान में

  • अर्जित शाश्वत चौबे- अश्विनी चौबे के पुत्र
  • प्रिंस राज*- रामचंद्र पासवान के पुत्र
  • युसुफ खान- चौधरी महबूब अली कैसर के पुत्र
  • विवेक ठाकुर*- डॉ. सीपी ठाकुर के पुत्र
  • संजीव चौरसिया- गंगा प्रसाद के पुत्र
  • अजय प्रताप सिंह- नरेन्द्र सिंह के पुत्र
  • कन्हैया सिंह- वीणा देवी के देवर
  • गीता पाण्डेय- सुनील पाण्डेय की पत्नी
  • संतोष सुमन-जीतन राम मांझी के पुत्र
  • संत सिंह कुशवाहा- उपेन्द्र कुशवाहा के रिश्तेदार
  • रणधीर सिंह- पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र
  • राहुल तिवारी-शिवानंद तिवारी के पुत्र
  • फराज फातमी- अली अशरफ फातमी के पुत्र
  • वर्षा रानी- बुलो मंडल की पत्नी
  • तेजस्वी-तेजप्रताप- लालू-राबड़ी के पुत्र
  • नितिन नवीन- नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र

* इनमें लोजपा के प्रिंस राज लोकसभा के सदस्य और भाजपा के विवेक ठाकुर राज्यसभा के सदस्य हैं।


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