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शहर से गांव तक डेंगू के सैकड़ों मरीज, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जिले भर में सिर्फ 12 लोग ही हैं बीमार

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मुजफ्फरपुर19 घंटे पहले

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पंकज मार्केट रोड में महीने भर से अधिक से काला पानी जमा है।

  • निजी नर्सिंग होम में करीब 200 लोग करा चुके हैं डेंगू का इलाज, बालूघाट में 30 लोगों में तेज बुखार व डेंगू के लक्षण

शहर से लेकर गांव तक जिले के सैकड़ों लोग डेंगू से पीड़ित है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में जिले में महज 12 लोग ही डेंगू से पीड़ित हैं। जिसमें मुशहरी में 1, बोचहां व मीनापुर में 4-4 और शहरी क्षेत्र में 3 मरीज हैं। इसमें भी 5 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि शहर के जूरन छपरा, ब्रह्मपुरा, जीरोमाइल समेत कई स्थानों पर स्थित एक दर्जन से अधिक निजी नर्सिंग होम में करीब 200 लोग डेंगू का इलाज करा रहे हैं।

जानकारी मुताबिक, डॉ. एके दास की क्लीनिक में 1 दर्जन से अधिक लोग डेंगू का इलाज करा चुके हैं। डॉ. लाल पैथ लैब्स द्वारा दो दर्जन लोगों में डेंगू होने की पुष्टि की जा चुकी है। इस लैब द्वारा वेक्टर बोर्न डिजीज विभाग को सूचना भी दी गई है। लेकिन एलिजा टेस्ट नहीं होने के कारण विभाग इन लोगों को डेंगू मरीज नहीं मान रहा है।

स्वास्थ विभाग निजी जांच घरों की रिपोर्ट को ही नहीं मान रहा है। बालूघाट इलाके में करीब 30 लोग तेज बुखार और डेंगू के लक्षण से पीड़ित हैं। तेज बुखार और डेंगू के लक्षण वाले सैकड़ों लोग ऐसे भी हैं जो कोरोना के भय से घर से निकल कर अस्पताल जाने के बजाय घर में रह कर ही स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कर रहे रहे हैं। सभी सीएचसी व पीएचसी में डेंगू जांच की सुविधा उपलब्ध है।

कोरोना के बीच इस बार विभाग डेंगू को भूला जागरूकता के नाम पर हुई सिर्फ खानापूर्ति
डेंगू ,चिकनगुनिया से बचाव को लेकर हर वर्ष स्वास्थ विभाग और जिला प्रशासन जागरूकता अभियान चलाता था। लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के बीच इस बीमारी को विभाग भूल ही गया। सिर्फ खानापूर्ति की गई। वेक्टर बोर्न डिजीज के जिला प्रभारी डॉ. सतीश कुमार का कहना है कि डेंगू से बचाव को लेकर प्रत्येक पीएचसी प्रभारी को गाइडलाइन जारी की गई है।

पीएचसी स्तर से गांव-गांव में आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी सेविकाएं लोगों को जागरूक कर रही हैं। बताया कि फिलहाल जिले में डेंगू के 12 मरीज हैं। मरीजाें के भाैतिक सत्यापन के बाद उसके घर के 500 मीटर के क्षेत्र में एंटी लार्वा केमिकल का छिड़काव किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में छिड़काव की जिम्मेदारी संचारी रोग नियंत्रण विभाग व शहरी क्षेत्र में नगर निगम के जिम्मे है।

सरकारी अस्पतालों में डेंगू का टेस्ट कराने की सलाह

डेंगू और कोरोना दोनों के शुरुआती लक्षण बुखार से ही शुरु होते हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक पोस्टर जारी किया है। जिसमें कोरोना वायरस के समय में डेंगू को नजरअंदाज नहीं करने का सुझाव और कुछ उपाय दिए गए हैं। जिले के वीबीडीसीओ पुरुषोत्तम कुमार कहते हैं कि यह समय कोरोना के साथ डेंगू और चिकनगुनिया का भी है। जिससे बचाव ही इसका उपयोगी उपचार होगा। दावा किया कि डेंगू से बचाव के लिए जिले में विभाग के द्वारा भी प्रयास किए जा रहे हैं।

डेंगू बुखार की पुष्टि के लिए एलाइजा टेस्ट ही है मान्य
डॉ. सतीश कहते हैं कि निजी क्लीनिक में एनएस-1 किट से ही जांच होती है। जबकि राज्य कार्यालय के आदेश और गाइडलाइन के अनुसार सरकारी अस्पतालों में मौजूद एलाइजा टेस्ट ही डेंगू की पुष्टि के लिए मान्य है। जिले के निजी जांच घरों को निर्देशित किया गया है कि अगर कोई एनएस-1 के रिजल्ट में पॉजिटिव आता है तो सूचित करें। विभाग उस रिपोर्ट और सैंपल को एसकेएमसीएच के माइक्रो बायोलॉजी विभाग में भेजेगा। वहां से सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर विभाग डेंगू मरीज का इलाज करेगा।


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