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सदर अस्पताल में छह डॉक्टरों के बावजूद एक साल से बंद है अल्ट्रासाउंड विभाग

सीवानएक घंटा पहले

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  • मरीजों को बाहर जाकर एक हजार रुपए खर्च कर कराना पड़ रहा अल्ट्रासाउंड, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का टूट रहा सपना

सदर अस्पताल के महिला वार्ड में छह डॉक्टरों की पदस्थापना है, लेकिन अल्ट्रासाउंड विभाग एक साल से बंद है। इस वजह से सदर अस्पताल में इलाज कराने अाने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने का सपना टूट रहा है। अल्ट्रासाउंड कराने आने के दौरान लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उसे बाहर जाकर पांच सौ से एक हजार रुपए खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। लेकिन विभागीय अफसर इस विभाग को चालू नहीं करा रहा है। जबकि इस विभाग में अल्ट्रासाउंड मशीन समेत अन्य सभी उपकरण पूरी तरह से सही सलामत है। लेकिन सिविल सर्जन और उपाधीक्षक द्वारा डॉक्टरों की ड्यूटी नहीं लगाए जाने की वजह से यह विभाग बंद पड़ा है। जबकि इलाज कराने आने वाली महिलाओं को बिना अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की ही इलाज करानी पड़ रही है।

अल्ट्रासाउंड चलाने के लिए डीजीओ डिग्री की आवश्यकता होती है। इस डिग्री के छह डॉक्टर सदर अस्पताल में है। इसमें डॉक्टर रीता सिन्हा काफी पहले से इस अस्पताल में पदस्थापित है। जबकि डॉ. रश्मि कुमारी भी पुरानी डॉक्ठर है। इसके बाद भी डॉ. अनिता कुमारी, डॉ. अंकिता पांडेय व डॉ. नीरज कुमार को विभाग ने पदस्थापित किया।

प्रत्येक डॉक्टर को ओपीडी में एक दिन ड्यूटी लगाने पर हो सकेगा समाधान
सभी छह डॉक्टर इन दिनों ऑन ड्यूटी पर हैं। फिर भी अल्ट्रासाउंड विभाग बंद है। जबकि सप्ताह में छह ही दिन ही ओपीडी का संचालन होता है। इसमें से अगर प्रत्येक डॉक्टर को ओपीडी में एक दिन ही ड्यूटी लगाई जाएगी तो सप्ताह भर अल्ट्रासाउंड विभाग खुलने लगेगा।

साथ ही प्रत्येक संडे को अगर एक डॉक्टर को ड्यूटी लगाई जाती है तो एक डॉक्टर को डेढ़ माह बाद संडे को इमरजेंसी ड्यूटी करने की बारी आएगी। लेकिन ड्यूटी करने को लेकर महिला डॉक्टर भी अस्पताल प्रशासन को सहयोग नहीं कर रही है। इस वजह से अभी तक इस विभाग को चालू नहीं किया गया।

गर्भवती महिलाओं को इलाज कराने आने पर गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत कैसी है, यह अल्टसाउंड से ही पता चलता है। पेट दर्द या पेट से सबंधित अन्य तरह की बीमारियां होने पर भी अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत पड़ती है। सदर अस्पताल मेें इलाज कराने आने वाले अधिकतर मरीज आर्थिक दृष्टिकोण से कमजोर होते हैं।

उसे जब अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिलती है तो बाहर जाकर उसे रुपए खर्च करना पड़ता है। कई मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए रुपए पड़ोिसयों से सगे- संबंधियों से कर्ज लेनी पड़ती है। फिर भी अल्ट्रासाउंड केन्द्र को चालू कराने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इस तरह पांच महिला डॉक्टर समेत छह डॉक्टरों के पदस्थापित होने के बाद भी मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भटकना पड़ता है।
सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड केन्द्र बंद है। इसे चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विचार- विमर्श चल रहा है। 15 अक्टूबर से इस केन्द्र को चालू कर दिया जाएगा। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा।
-डॉ. यदुवंश कुमार शर्मा, सिविल सर्जन, सीवान


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