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सारी दुनिया का बोझ उठाने वालों से नहीं उठ रहा पासवान की मौत का बोझ, यार्ड में जाकर कुलियों से बतियाते थे रामविलास

पटना12 मिनट पहले

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रामविलास पासवान की अंतिम यात्रा में रेलवे के कुली भी शामिल हुए।

  • कुलियों के कंधे पर हाथ रखकर उनसे बातें करते थे, अटका काम करवाते थे, आर्थिक मदद भी करते थे
  • रामविलास पासवान के एसके पुरी स्थित घर उनके अंतिम दर्शन को आए थे उत्तर प्रदेश के भी कई कुली

लाल कपड़ों में रेलवे स्टेशनों पर सारी दुनिया का बोझ उठाने वालों से रामविलास पासवान की मौत का बोझ नहीं उठ रहा है। उन्होंने अपना मसीहा खो दिया है। शनिवार को अपने मसीहा के अंतिम दर्शन के लिए एसके पुरी आए दर्जनों कुलियों के दिल में बड़ा दर्द दिखा। इनमें बिहार ही नहीं, यूपी के भी कुली थे। वे रामविलास पासवान के साथ स्टेशन के यार्ड में बिताए यादगार पल को सोचकर सिसक रहे थे। रामविलास पासवान ही ऐसे रेल मंत्री हुए जो अधिकतर कुलियों को नाम से जानते थे और यार्ड में जाकर उनके कंधे पर हाथ रख देते थे। रामविलास के अंतिम दर्शन को आए कुलियों में से अधिकतर ऐसे थे जिन्हें पासवान ने काफी मदद की थी। किसी की पत्नी का ऑपरेशन कराया तो किसी की आर्थिक मदद की।

अंतिम सांस तक नहीं भूल पाएंगे सम्मान
रामसुलभ 30 साल से हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर कुली का काम कर रहे हैं। कहते हैं- जीवन में बहुत बोझ उठाया, लेकिन रामविलास जी की मौत का बोझ नहीं सहा जा रहा। लगता है हमने अपने भगवान को खो दिया है। वह जब भी वह राजधानी से जाते थे, स्टेशन पर आकर हमारे पास चले आते थे। पहले से ही सूचना मिल जाती थी कि रेल मंत्री आ रहे हैं। हम लोग तैयार हो जाते थे। हमारा कपड़ा उतना साफ नहीं होता था, लेकिन वह कंधे पर हाथ रखकर घर-परिवार का हाल चााल पूछते थे। कोई समस्या होती तो तत्काल फोन लगाकर काम करा देते थे। पैसे की जरूरत होती तो जेब से निकालकर दे देते थे। यार्ड में कुलियों को नाम से बुलाते थे।

कुली को बेटा हुआ तो बंटवाई मिठाई
एक कुली किशुन ने बताया कि रामविलास जी रेल मंत्री रहते एक बार हमलोगों से मिलने आए थे। बात-बात में उन्हें पता चल गया कि मेरी पत्नी को बेटा हुआ है। इस पर वह जेब से पांच सौ का नोट निकाले और सभी को मिठाई खिलाने को कहा। हाजीपुर स्टेशन पर उस दिन हम कुलियों की खुशियां सातवें आसमान पर थीं। ऐसा रेल मंत्री पहली बार ऐसा देखा, जो वीआईपी नहीं गरीबों के लिए साथ खड़ा होने वाला था।

नम आंखों से कुलियों ने दी विदाई
हाजीपुर और पटना से लेकर सोनपुर व यूपी के कई स्टेशनों से आए कुलियों की आंखें नम थीं। चेहरे से गम साफ दिख रहा था। उनका कहना है कि हम लोगों को लग रहा है कि अपना कोई परिवार का चला गया हो। वह अपनी ऐसी छाप छोड़ गए हैं जिसे हम कभी भूल नहीं पाएंगे।


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