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सुशांत न कोराेना न ही कृषि बिल मुद्दा, नीतीश-लालू और स्थानीय प्रत्याशी मसला; आखिरी समय में जातीय समीकरण बदलेगा माहौल

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पालीगंज3 मिनट पहले

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  • जयवर्द्धन के जदयू में जाने से भाजपा भी पसोपेश में, जदयू अपना मान रही

(पालीगंज से राहुल पराशर) पालीगंज विधानसभा सीट का राजनीतिक समीकरण करीब-करीब साफ हो गया है। महागठबंधन में यह सीट भाकपा-माले के खाते में गई है। पिछली बार यहां से राजद जीता था। राजद विधायक जदयू का पाला थाम चुके हैं। लिहाजा जो परिदृश्य बन रहा है, उसमें इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच मुख्य मुकाबला होगा। इस विधानसभा सीट में न तो कृषि बिल मुद्दा है और न ही चीन सीमा पर तनाव।

सुशांत की मौत का मामला हो या फिर राम मंदिर का मुद्दा, राष्ट्रीय स्तर के कोई भी मुद्दे विधानसभा चुनाव में हावी होते नहीं दिख रहे हैं। चुनावी मुद्दा नीतीश कुमार, लालू प्रसाद व स्थानीय उम्मीदवार ही हैं। लोग भले ही शिक्षा, भ्रष्टाचार, नल-जल, गांव की सड़क, स्वास्थ्य को मुद्दा बताते हैं पर जातीय समीकरण ही आखिरी समय में चुनावी माहौल को बदलने में कामयाब होगा। कोरोना की तो चर्चा ही यहां बेमतलब है।

एनडीए में किसे मिलेगी सीट, तय नहीं, जदयू के पाले में जाती दिख रही

स्थानीय स्तर पर जिस प्रकार की चर्चा है, उस हिसाब से सीट जदयू के पाले में जाती दिख रही है। ऐसा स्थानीय राजद विधायक जयवर्द्धन यादव के जदयू में शामिल होने के बाद हुआ है। इसने पूरे विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण को ही उलट-पलट कर रख दिया है। भाजपा इस सीट पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ना चाहती है। पार्टी इसे अपनी परंपरागत सीट मानती है। पिछले चुनाव में यहां भाजपा उम्मीदवार रामजनम शर्मा थे, उन्हें 41 हजार से अधिक वोट मिले थे। वे 24,453 वोट से हारे थे। सीट, जदयू के पाले गई तो जयवर्द्धन का दावा प्रबल है और भाकपा माले के उम्मीदवार संदीप सौरभ होंगे। संदीप, जेनएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और फिलवक्त माले की छात्र इकाई आइसा के बड़े पदाधिकारी हैं।

पालीगंज विधानसभा क्षेत्र में वोटर

2015 में वोटिंग 5% बढ़ी, जीत का अंतर 8%

2010 के चुनाव के मुकाबले पालीगंज में वोटिंग प्रतिशत में 2015 में 5% से अधिक वृद्धि हुई। 2010 में यहां 50 फीसदी पोलिंग रिकॉर्ड हुई थी। वहीं, 2015 के चुनाव में 55.79% पोल हुआ। 2010 में भाजपा की उषा विद्यार्थी ने राजद के जयवर्धन यादव को 10,242 वोटों से हराया था। जीत का अंतर कुल पड़े वोट का 8.84 फीसदी था। तीसरे स्थान पर पूर्व विधायक माले के नंद कुमार नंदा थे। वहीं, 2015 के चुनाव में राजद के जयवर्धन यादव ने भाजपा के रामजनम शर्मा को हराया। राजद-जदयू गठबंधन के उम्मीदवार को 65,932 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार को 41,479 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार जीत का अंतर 24,453 का रहा। जीत का अंतर कुल पड़े वोट का 17.01 फीसदी रहा। तीसरे स्थान पर रहे माले के अनवर हुसैन को 19,438 वोट मिले।

भूमिहारों को दिख रहा है अस्तित्व का संकट

पालीगंज में भूमिहार वोटर बड़ी भूमिका निभाते हैं। भरतपुरा के सुकेश्वरधारी ने बताते हैं कि भूमिहारों के बीच चर्चा इस बात की है कि यह सीट हाथ से निकल गई तो पटना जिले में एक ही सीट बिक्रम रहेगी। इस सीट पर जीत मिले या हार, भूमिहार हमेशा दिखे हैं।

बागी बिगाड़ सकते हैं सियासी दलों का खेल

बागियों की बड़ी भूमिका हो सकती है। पैक्स अध्यक्ष सुमेर सिंह कहते हैं कि अगर एनडीए की ओर से जदयू के पाले में सीट गई तो भाजपा की उषा विद्यार्थी निर्दलीय लड़ सकती हैं। वहीं, कुशवाहा समाज की उपेक्षा के विरोध में भाजपा के ही अशोक वर्मा उतर सकते हैं।

जातीय गणित में माय समीकरण सबसे आगे

जातीय गणित माय समीकरण के पक्ष में है। यादव वोटरों की 71 हजार और मुस्लिम वोटरों की संख्या 20 हजार है। कुल वोटरों का 32.5% है। यादव के बाद सबसे अधिक 45 हजार भूमिहार वोट है। वहीं, कोयरी व कुर्मी वोटरों की संख्या करीब 30 हजार है।


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