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4 दशक से चुनाव में उठता है मुद्दा पर वोटिंग के साथ ही खत्म; पीपा पुल बना हर साल कराेड़ाें की वसूली

मुजफ्फरपुर33 मिनट पहले

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बागमती नदी पर बना पुल। पहले नक्सलियों ने पीपा पुल बनवाया फिर सांसद ने उद्घाटन किया। अब इस पुल से गुजरने वालों से वसूली की जा रही है।

  • सीतामढ़ी के कटाैंझा पुल से लेकर गायघाट के बेनीबाद के बीच बागमती पर एक भी स्थायी पुल नहीं

राजनीति और अपराध का रिश्ता खत्म नहीं हो पाता है। इसका उदाहरण है… बागमती नदी पर बना पुल। पहले नक्सलियों ने पीपा पुल बनवाया फिर सांसद ने उद्घाटन किया। अब इस पुल से गुजरने वालों से वसूली की जा रही है। पैदल से 5 रु., साइकिल से 10, बाइक से 20 रुपए चारपहिया से 50 रुपए वसूल किए जाते हैं। यह मुद्दा 4 दशक से चुनावों में उठता है लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ।

मैं बागमती हूं। यहां नेपाल से बहते हुए आई हूं। मेरी बहन बूढ़ी गंडक शहर के किनारे से गुजरती है। मैं भी कभी शहर से महज 12 किलाेमीटर दूर थी। तब मेरी धारा काे पार करने के लिए जगह-जगह पुल बने थे। धीरे-धीरे मेरी धारा शहर से दूर हाेती चली गई। अब मैं शहर से 30 किलाेमीटर दूर हाे गई।

मैं जिले के औराई, कटरा व गायघाट की जमीन से गुजरने लगी हूं। मेरी धारा क्या बदली… शासन-प्रशासन ने आंखें ही मूंद ली। औराई व कटरा में मेरी धारा काे पार करने के लिए एक भी पुल नहीं है। गायघाट में भी मेरी धारा के ऊपर बेनीबाद में दरभंगा फाेरलेन पर महज एक पुल है। पिछले चार दशक से यह चुनावी मुद्दा भी रहा। कटाैंंझा में किसी तरह सीतामढ़ी एनएच पर 2006 में एक पुल बनकर तैयार हुआ। वहीं बूढ़ी गंडक की धारा काे पार करने के लिए शहर के आसपास ही तीन पुल है।

20 साल पहले नक्सली ने बनाया था चचरी पुल, वसूली के लिए खूनी संघर्ष भी हुआ

कटाैंझा से बेनीबाद के बीच करीब 32 किमी की धारा पर दबंगाें ने कब्जा कर रखा है। चचरी व पीपा पुल बनाकर उगाही शुरू है। मेरी धारा पार करने के लिए लाेगाें काे टैक्स देने हाेते हैं। जब नक्सलियाें का आतंक था तब साल 2000 के करीब एक नक्सली ने कटरा प्रखंड मुख्यालय के करीब बकुची घाट पर मेरी धारा पार करने के लिए बांस का चचरी पुल बनाया। लाेगाें से वसूली करने लगा। 2010 के बाद एक दबंग ने उस चचरी पुल के समानांतर पीपा पुल बना दिया।


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