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पुरानी दर फिर बताने की नौबत क्यों?: इलाज के लिए निजी अस्पतालों को अनुमति का अधिकार जिलों को दिया तो फिर दोहराया रेट, जबकि अस्पतालों में वसूली पर कभी रोक लगी ही नहीं

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पटना8 मिनट पहले

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राज्य सरकार को खबर है कि निजी अस्पताल कोरोना मरीजों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। संक्रमण का खतरा, ऑक्सीजन की कमी, ICU चार्ज, डॉक्टर की कमी…और न जाने कितने बहाने। ग्राउंड रियलिटी यही है भी। इस बीच शनिवार को सरकार द्वारा निजी अस्पतालों में इलाज की दर तय करने की खबर आई। भास्कर ने जब इस तय दर की रियलिटी जांची तो यह सामने आया कि यह आदेश तो 8 महीने पहले भी जारी हुआ था। बिना अंतर दोबारा वही आदेश क्यों? तो, जान लीजिए वजह – कारण यह है कि सरकार ने मरीजों की बढ़ती तादाद को देख निजी अस्पतालों में कोविड इलाज की अनुमति का अधिकार जिलों को ही देने का फैसला किया है। नई अनुमति लेने वाले अस्पतालों को रेट पता हो, इसलिए सरकार ने आदेश के साथ 8 महीने पुरानी दर दोबारा जारी की है। दूसरी तरफ मरीज की जान न ले लें, इस डर से अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन बस इतना कह रहे- “अस्पतालों ने रेट अपना रखा है, सरकार के पिछले आदेश का असर नहीं पड़ा तो फिर आदेश जारी करने का अर्थ ही नहीं।”

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने 17 अप्रैल 2021 को सभी जिला पदाधिकारी और सभी सिविल सर्जन को जो पत्र (पत्रांक- 65 H.S.) जारी किया है उसमें स्पष्ट लिखा भी है कि यह निर्णय लिया गया है कि कोविड-19 संक्रमित व्यक्तियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों से प्राप्त सभी आवेदनों के आधार पर संबंधित निजी अस्पताल का जिला स्तर पर दल का गठन कर सत्यापन कराया जाएगा। अस्पतालों में उपलब्ध आधारभूत संरचना एवं सुविधा के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकरण करते हुए श्रेणी के अनुरूप कोविड-19 के इलाज की अनुमति प्रदान की जाएगी। जिला प्रशासन और सिविल सर्जन द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व से निर्धारित श्रेणीवार अधिकतम दर के अधीन ही रोगियों से उपचार शुल्क लिया जाए। यह कहते हुए सरकार ने 20 अगस्त 2020 का आदेश ही जारी कर दिया है।

उत्तर प्रदेश का मॉडल मरीज और उनके परिजनों को राहत दे रहा, यहां कोई मॉनिटरिंग ही नहीं
बिहार में सबसे ज्यादा दिक्कत यह हो रही है कि प्राइवेट अस्पताल मरीजों से भर्ती के समय सिक्यूरिटी मनी के नाम पर 50 हजार या लाख रुपए तक जमा ले रहे हैं। जिसकी जैसी चल रही है, कर रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित दरों का पालन किया जा रहा है कि इसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। मरीज जब तक अस्पताल में भर्ती रहता है परिजन डर से बाहर कुछ बोलते नहीं। उन्हें लगता है कि बाहर मुंह खोलेंगे तो अस्पताल में मरीज का रहना दुश्वार हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने सभी प्राइवेट अस्पतालों पर एक नोडल अफसर तैनात कर दिया है जिसकी जवाबदेही यह देखने की है कि अस्पताल में आने वाले मरीज या उनके परिजनों को किसी तरह की कठिनाई तो नहीं हो रही, अस्पताल मनमानी तो नहीं कर रहे। वहां की सरकार उस नोडल अफसर का नंबर मीडिया में जारी कर रही। इसकी वजह से प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाया जा रहा है, लेकिन बिहार में बेड देने के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। सरकार ने पुरानी दरों को नए लेटर के साथ सभी जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को भेज तो दिया पर इसका पहले की ही तरह बहुत असर होता नहीं दिख रहा।

बिहार सरकार ने तय की थीं दरें

बिहार सरकार ने अगस्त 2020 में प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के इलाज से जुड़ी मनमानी को रोकने के लिए रेट तय किया था, ICU वेंटिलेटर के लिए दर 18 हजार रुपए अधिकतम तय थी। बिहार के जिलों को तीन A, B और C कैटोगरी में बांटा गया था। A श्रेणी में सिर्फ पटना को जबकि B श्रेणी में भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया, पूर्णिया जिले को और C में शेष अन्य जिलों को रखा था। प्राइवेट अस्पतालों को दो कैटेगरी में बांटते हुए पहली श्रेणी में नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) से मान्यता प्राप्त अस्पतालों और दूसरी श्रेणी में गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों को रखा गया था।

B कैटेगरी शहरों के आइसोलेशन वार्ड के लिए अधिकतम 8000 रुपए तय थे
B कैटेगरी के पांच जिलों भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और पूर्णिया के मान्यता प्राप्त अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड के कोरोना मरीजों के इलाज लिए अधिकतम प्रतिदिन 8000, ICU के मरीजों के लिए 12,000 और ICU में वेंटिलेटर के साथ भर्ती के लिए अधिकतम 14,400 रुपए प्रतिदिन निर्धारित किया गया था। गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड के लिए अधिकतम 6,400 रुपए, ICU के लिए 10,400 और ICU में वेंटिलेटर के साथ के लिए इलाज के लिए अधिकतम 12,000 रुपये प्रतिदिन निर्धारित किया गया था।

C कैटेगरी के सभी शहरों में प्रतिदिन अधिकतम 9000 हजार रुपए तय
C कैटेगरी में शामिल शेष सभी जिलों के मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड के लिए अधिकतम प्रतिदिन 6000 रुपए, ICU के लिए 9000 रुपए, ICU में वेंटिलेटर के साथ इलाज के लिए 10,800 रुपए निर्धारित किए गए थे। इन जिलों के गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड के लिए अधिकतम 4,800 रुपए, ICU के लिए 7800 रुपए और ICU में वेंटिलेटर के साथ इलाज के लिए 9000 रुपए प्रतिदिन अधिकतम शुल्क तय किया गया था।

पटना में ICU वेंटिलेटर के लिए 18 हजार निर्धारित

सरकार ने पटना जिले में मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए प्रतिदिन अधिकतम 10 हजार रुपए, ICU में भर्ती मरीजों के लिए 15,000 रुपए और ICU में वेंटिलेटर के साथ भर्ती मरीजों के लिए अधिकतम प्रतिदिन 18 हजार रुपए की सीमा तय की थी। पटना जिला स्थित गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों को अधिकतम 8000 रुपए प्रतिदिन का भुगतान तय किया गया था। ICU में भर्ती मरीजों के लिए अधिकतम 13,000 और ICU में वेंटिलेटर के साथ भर्ती मरीजों के लिए 15,000 रुपए प्रतिदिन तय किया गया था। इसमें PPE किट की राशि भी शामिल थी।

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