Sunday , May 16 2021
Breaking News

फेल हो रही सरकार की व्यवस्था: राजधानी में मात्र 543 बेड, इसमें भी 90 % फुल; सरकारी से 2 गुणा अधिक प्राइवेट में बेड लेकिन इलाज का रेट हाई

  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Gouvernement Management For Corona Patient In Hospitals Critical; Bed Not Available In Corona Pandemic

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पटना2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
सांकेतिक तस्वीर। - Dainik Bhaskar

सांकेतिक तस्वीर।

  • राजधानी पटना है बिहार का आइना, यहां की व्यवस्था खोल रही दावों की पोल

आपकी सेहत को लेकर आपकी सरकार कितनी गंभीर और संवेदनशील है। इसका अंदाजा कोरोना के बेड से लगा सकते हैं। कोरोना से लड़ाई की तैयारी को एक साल पूरे हो गए लेकिन आज भी व्यवस्था में सरकार काफी पीछे नजर आ रही है। राजधानी पटना पूरे बिहार के लिए आइना है तो बात भी यहीं से शुरू करते हैं। पटना में सरकारी इंतजाम नाकाफी हैं। प्रदेश का हर गंभीर मरीज पटना आ रहा है लेकिन यहां सरकारी व्यवस्था मात्र 543 बेड की है जिसमें 90 प्रतिशत बेड हर दिन फुल रहते हैं। सरकारी व्यवस्था से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में बेड हैं लेकिन यहां इलाज गरीबों के लिए आसान नहीं है। ऐसे में एक तरफ कोरोना मौत बनकर खड़ा है तो दूसरी तरफ सरकारी सिस्टम मार रहा है।

पटना में यह है सरकार की व्यवस्था

प्रदेश की राजधानी पटना में हर बिगड़ा मामला आता है। हर छोटे बड़े सरकारी अस्पताल से रेफर होने वाले मामले पटना ही आते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्था राजधानी के लिए लोगों के लिए ही पर्याप्त नहीं हैं। एक साल से कोरोना का संक्रमण है और पहले से ही दूसरी लहर के खतरे को लेकर अलर्ट था। इसके बाद भी सरकार की तरफ से कोरोना को लेकर कोई बड़ी तैयारी नहीं की गई है। पटना में मौजूदा समय में मात्र 543 बेड ही हैं। बात 24 घंटे पहले रविवार को इसमें बेड मिलने की गुंजाइश की करें तो 543 में 457 बेड पर गंभीर लक्षण वाले मरीज भर्ती थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मात्र 86 बेड की खाली थे। जबकि, रविवार को पटना में एक्टिव मामलों की संख्या 12118 हो गई थी। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि 10 प्रतिशत की भी हालत गंभीर हुई तो उन्हें बेड के अभाव में भर्ती नहीं किया जा सकेगा।

प्राइवेट से उम्मीदें, लेकिन पैसा चाहिए

सरकारी व्यवस्था से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में बेड हैं। लेकिन, यहां इलाज के लिए पैसा चाहिए। गरीबों के लिए प्राइवेट अस्पतालों का खर्च उठा पाना आसान नहीं है। हालांकि सरकार ने प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए रेट तय कर दिया है और अलग अलग अस्पतालों का ग्रेड के हिसाब से रेट तय किया है। इसके बावजूद प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर लगाम कसने वाला कोई नहीं है। पटना में लगभग 50 निजी हॉस्पिटल को कोरोना केयर बनाया गया है। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो यहां 985 बेड हैं। यह बेड सरकारी व्यवस्था से लगभग दो गुणा हैं। इसके बाद भी यहां बेड खाली होने के बावजूद मरीज भर्ती नहीं हो पाते क्योंकि सरकार ऑक्सीजन ही नहीं दे पा रही है। 24 घंटे पहले शनिवार के आंकड़ों की बात करें तो पटना में प्राइवेट हॉस्पिटल में कुल 985 बेड में 860 पर गंभीर लक्षण वाले मरीज भर्ती थे। प्राइवेट अस्पतालों में मात्र 125 बेड ही खाली थे। यहां शहर के अधिकांश लोग ही भर्ती हैं, बाहर से आने वाले जो आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज नहीं करा पा रहे हैं। क्योंकि यहां मरीज को भर्ती करते समय ही मोटी रकम जमा कराई जाती है।

पटना में 1898 नए और 12118 एक्टिव केस में यह है व्यवस्था

पटना में शनिवार को 24 घंटे में 1898 नए मामले आए हैं। इन मामलों को मिलाकर एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 12118 हो गई है। लेकिन व्यवस्था के नाम पर सरकारी और प्राइवेट अस्पताल मिलाकर कुल 211 बेड ही खाली हैं। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो पटना के सरकारी अस्पतालों में कुल बेड 543 हैं जिसमें 457 फुल हैं मात्र 86 बेड खाली हैं। प्राइवेट में 985 बेड हैं जिसमें 860 फुल हें मात्र 125 बेड खाली है। पटना में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कुल व्यवस्था की बात करें तो मात्र 211 बेड ही खाली हैं।

सरकार की व्यवस्था का फैक्ट

  1. पटना में 543 सरकारी बेड 457 फुल 86 खाली
  2. पटना के प्राइवेट हॉस्पिटल में 985 में 860 फुल मात्र 125 बेड खाली
  3. प्राइवेट और सरकारी अस्पताल मिलाकर कुल 211 बेड खाली

यह व्यवस्था भी जान लीजिए

हॉस्पिटल बेड ICU

AIIMS 220 40

PMCH 105 25

NMCH 178 13

ESIC 40 10

Total 543 88

ICU में भी फेल है सरकारी इंतजाम

पटना में सरकारी अस्पतालों में कुल 543 बेड हें जिसमें मात्र 88 ICU है। कोरोना संक्रमितों के लिए ICU का इंतजाम सबसे जरुरी है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में ICU तक का इंतजाम नहीं है। पटना के सरकारी अस्पतालों में ICU में जाने वाले मरीजों को हमेशा इंतजार करना पड़ता है।

प्राइवेट में 377 ICU लेकिन हर घंटे देना पड़ता है मोटा चार्ज

पटना में कोरोना का इलाज करने वाले प्राइवेट अस्पतालों में कुल 33 हॉस्पिटल में 377 ICU है लेकिन इसका रेट काफी हाई है। यहां प्रति घंटे के हिसाब से मरीजों को पैसा देना होता है जो इलाज पर काफी भारी पड़ता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पटना के 33 प्राइवेट हॉस्पिटल में 985 बेड हैं जिसमें 377 ICU है। प्रशासन का दावा है कि 14 और प्राइवेट हॉस्पिटल को कोरोना के इलाज के लिए तैयार किया जा रहा है जिसमें 199 बेड हैं।

प्रशासन का दावा और हकीकत में बड़ा फर्क

पटना के जिला प्रशासन का दावा है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए बड़ा प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को 24 घंटे में 3 एजेंसियों से 3973 सिलेंडर की आपूर्ति सरकारी एवं निजी अस्पतालों में की गई। इसके साथ ही दावा किया गया है कि ऑक्सीजन रिफिलिंग का काम तेजी से चल रहा है। प्रशासन के इस दावे में कोई दम नहीं है क्योंकि अधिकतर प्राइवेट हॉस्पिटल को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इस कारण से इलाज में बाधा आ रही है।

इन अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत

  • श्री राम हॉस्पिटल, एस के पुरी
  • नेसवथिया हॉस्पिटल, यारपुर
  • मेडिजोन, कंकड़बाग
  • उमा हॉस्पिटल, कंकड़बाग
  • समय हॉस्पिटल, सगुना मोड़
  • नियेदा, कंकड़बाग
  • ऑक्सीजोन, कंकड़बाग
  • हाईटेक हॉस्पिटल, दानापुर
  • श्रीराम हॉस्पिटल, कंकड़बाग
  • मेडिवर्सल, कंकड़बाग
  • गैलेक्सी, कंकड़बाग
  • आर डी मेमोरियल, 90 फीट
  • श्याम हॉस्पिटल, 90 फीट
  • पंचशील हॉस्पिटल, कंकड़बाग
  • प्रयास हॉस्पिटल, बैंकमन कॉलोनी
  • मौर्या हॉस्पिटल, 90 फीट
  • क्यूरियस हॉस्पिटल, दानापुर

खबरें और भी हैं…

Source link

About divyanshuaman123

Check Also

दो गिरोहों की लड़ाई में घोड़े की जान पर आफत: लखीसराय में दो गुटों में गोलीबारी, जब किसी आदमी की जान न ले सके घोड़े को लाठी-डंडे से पीट दिया, हालत नाज़ुक

दो गिरोहों की लड़ाई में घोड़े की जान पर आफत: लखीसराय में दो गुटों में गोलीबारी, जब किसी आदमी की जान न ले सके घोड़े को लाठी-डंडे से पीट दिया, हालत नाज़ुक

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप लखीसराय34 …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *