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रिपोर्टर: असली-नकली शराब की कीमत क्या है तस्कर: ब्लेंडर 870 रु., नकली आधी कीमत में

कटिहारएक दिन पहले

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नकली बरामद शराब के साथ कुरसेला पुलिस (फाइल फोटो)।

  • झारखंड और बंगाल से तस्करी कर शराब के नाम पर जहर पिला रहे धंधेबाज कहा-नकली में सिर्फ स्प्रिट रहती है, सामान्य लाेगों को नहीं चलता है पता
  • धंधेबाज ने कबूला-बंगाल और दालकोला में नकली शराब का होता निर्माण

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के 4 साल से अधिक हो गए पर शराब पर पूर्ण नियंत्रण नहीं हो सका। पड़ोसी राज्य से चोरी-छिपे शराब की तस्करी जोरों पर है। तस्करी का फायदा उठाकर नकली शराब भी पड़ोसी राज्य से सप्लाई की जाती है। जब भास्कर संवाददाता ने शराब के अवैध धंधा करने वालों से संपर्क किया तो चौकाने वाला सच सामने आया। संवाददाता और धंधेबाजों के बातचीत में पता चला कि बंगाल और झारखंड से शराब की तस्करी होती है। बताया कि 670 रुपए में आरसी 870 रुपए ब्लेंडर का रिटेल दाम है। बात करे नकली शराब की तो उसकी भी वही कीमत होती है पर लोग उसे पकड़ नहीं पाते हैं। कार्टन में ओरिजिनल और नकली मिलाकर सप्लाई किया जाता है। धंधेबाजों ने कहा कि नकली शराब की कीमत आधा है पर कीमत बराबर लिखा होता है। कोई पकड़ नहीं पाएगा नकली है कि ओरिजिनल। कहा कि नकली शराब जिले के साइड एरिया में मिल जाएगा। हाल के दिनों में सूबे व देश के अन्य राज्यों में जहरीली शराब पीने से 300 से भी अधिक लोगों की मौत हो गई है। बावजूद इसके प्रशासनिक अमला का ध्यान इस ओर आकृष्ट नहीं होना कहीं न कहीं प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है। जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के कई इलाकों में निर्मित देसी शराब बिठाकर परोसे जा रहे हैं। जहरीली शराब एवं डुप्लीकेट शराब के सेवन से किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

पुलिस के डर से नहीं करते शिकायत
कोढ़ा थाना क्षेत्र के कोलासी, बरारी थाना क्षेत्र, मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के मनिया कोठी, नगर थाना क्षेत्र के कोरिया पट्टी सहित अन्य इलाकों में लोगों को बिठा कर देसी व विदेशी शराब परोसी जा रही है। जिसमें अधिकांश क्षेत्र में शराब कारोबारी अधिक मुनाफे के लिए शराबियों को डुप्लीकेट दारू बेचते हैं। शराब के शौकीन व शराबी शराब लेकर जब उसका सेवन करते हैं तो कुछेक लोगों को उक्त शराब का टेस्ट अलग नजर आता है। बावजूद पुलिस के डर से वह खामोशी से उस शराब को गटक लेते हैं।

यहां होती है नकली शराब का निर्माण
धंधेबाजों ने बताया कि डुप्लीकेट शराब का निर्माण पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, पंजीपारा, दालकोला सहित अन्य जिलों में व्यापक तौर पर होता है। इसके अतिरिक्त पूर्णिया में भी डुप्लीकेट शराब का निर्माण होता है। पूर्णिया में निर्माणाधीन शराब की बिक्री कटिहार सहित सीमांचल के जिलों में की जाती है।

जब्त शराब की होती है जांच
केमिस्ट से शराब की अल्कोहल जांच कराकर इसकी रिपोर्ट की
जाती है।
केशव कुमार झा, उत्पाद अधीक्षक, कटिहार।

धंधेबाज और रिपोर्टर से बातचीत के अंश
रिपोर्टर: हैलो कहां हो, शराब का होलसेल रेट क्या है ?
शराब धंधेबाज: 670 रुपए है। आरसी का भी वही रेट है। ब्लेंडर का 870 रुपए रिटेल प्राइस है।
रिपोर्टर: हाफ का कितना पड़ता है ?
शराब धंधेबाज: आधा करके 10 रुपए बढ़ा देते हैं।
रिपोर्टर: नकली शराब का रेट क्या है ?
शराब धंधेबाज: दालकोला में नकली शराब बन रही है। बंगाल में यही चल रहा है।
रिपोर्टर: नकली और असली में क्या अंतर दिखता है?
शराब धंधेबाज: जिसको नहीं जानकारी है वही खरीदता है। रेट का भी अंतर रहता है। प्रिंट रेट समान रहता है लेकिन जो पीता है वही पकड़ सकता है कि नकली है या असली। ढ़क्कन से भी पता चल जाएगा कि नकली है या असली।
रिपोर्टर: सामान्य कारोबारी तो नहीं पाएगा?
शराब धंधेबाज: नहीं पकड़ पाएगा क्योंकि रैपर पर भी समान रेट अंकित रहता है।
रिपोर्टर: कटिहार में नकली माल की सप्लाई
होती है क्या ?
शराब धंधेबाज: असली में दो चार नकली शराब का कार्टून लगा देगा तो पता नहीं चलेगा।
रिपोर्टर: तो क्या मिलावटी शराब पी रहा है लोग?
शराब कारोबारी: नकली में तो पूरी तरह
से स्प्रिट रहता है।
रिपोर्टर: कहां कहां मिलती है नकली शराब ?
शराब धंधेबाज: जिले का जो साइड एरिया है न वहां मिलती है नकली शराब।


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