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लॉकडाउन में सुत्तल रहे, अब चुनाव के बरसाती मेंढक बन कर विधायक जी विकास का गड्ढा कोड़ दिए हैं

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सहरसा25 मिनट पहलेलेखक: चारुस्मिता

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स्थान- पूरब बाजार, कायस्थ टोला, सहरसा
समय- सुबह के साढ़े 6 बजे

लॉकडाउन की तरह अक्टूबर की सुबह भी अब थोड़ी नरम हो चली है। मॉर्निंग वॉक पर निकले कुछ लोग चहलकदमी कर रहे हैं। इसी बीच पैसेंजर ट्रेन के जाते ही रेलवे ढाला खुल जाता है और बाइक से सरसराते हुए बिधान चच्चा सीधे पूरब बाजार स्थित कायस्थ टोला के फेमस अशोक टी स्टॉल पहुंच जाते हैं। जाने क्या काम रहा होगा जो सुबह की चाय तक घर पर नहीं पी पाए हैं।

खैर, हेलमेट उतारते हुए बेंच पर धस्स से बैठ गए और कहने लगे- ‘सहर का हाल तो एकदम्मे गेल है।’ उनकी बात सुन सुबह की हवा खाने निकले लकी दत्ता (एलटी) से रहा नहीं गया। तपाक से बोल उठा- ‘काहे चच्चा क्या हो गया? चुनाव है, सहर का हाल तो एकदम चकाचक होने वाला है’।

पेट फुलाए बिधान चच्चा बगले में बैठे हट्टे-कट्टे मार्शल से बोले- ‘देखते हो? ई है आज का नवजुवक…शहर का विकास देख रहा है, अइसा होता है विकास। इहो पिंटुए की तरह चाय बेचकर आत्मनिर्भर बनेगा।’

ऐ चच्चा ऐसा काहे बोलते हैं। हम तो लकी दत्ता से एलटी बन गए और आप हमारा स्टेटस गिराने में लग गए? बताइए क्या हो गया…चच्चा सुनाने लगे की कहियो रे लक्किया गंगजला में गिर गेलियौ, पैर बैच गेलौ, नै त कैल्हे साफ रहियो।

धड़फड़ाते हुए टोले के एक और युवक बॉली ने पूछा- ‘क्या हो गया? चच्चा उधर काहे गए, हाल तो सच्चे में खराब है। कल का अखबार नहीं देखे क्या? दो लड़का का पैर फ्रैक्चर हो गया गड्ढा में गिरने से। पूरे सहर में विकास का गड्ढा खोद दिए हैं। ऐसे कोड़े है पूरा सहर कि सहरसा का लहरिया कट मारे वाला सब भी घरे सुत्तल है।

बॉली ने जैसे लक्की के जुबान की बात छीन ली, कहने लगा- ‘ठीके कह रहे हैं भाईजी, कोनो वार्ड जाइए वही हाल है। गंगजला हो या तिवारी टोला सब जगह जाने जाए के डर है। का विकास कर लिए विधायक जी? लॉकडाउन में तीन महीना घरे में ऐश फरमाए, आ अब देखिए बरसाती मेंढक बन के कैसे पूरे सहरसा को कोड़ रहे हैं?’

बिधान चच्चा कहने लगे- ‘रे तू सब आज देख रहा है। हम त सत्ता के खेल 85 से देख रहे हैं। भोकाल पार के सब पार्टी वोट ले जाता रहा। विकास के नाम पर कुच्छो किया है? ना तो सहर के सड़के ठीक किया ना फ्लाईओवरे बनवाया। वही सुपौल का सड़क देखो लगता है मक्खन लगा दिया गाड़ी के स्पीड में। हड़हड़ा के गाड़ी 25-30 किलोमीटर तक कब पहुंच जाता है पते नहीं चलता है।’

बॉली कहने लगता है एकदम सही कहे हैं। उधर तो अपाची पर बैठकर हवा में बात कीजिए लेकिन सहरसा में तो भूल जाइए। यहां का सड़क आज बना कल टूटा। विधायक जी और ठेकेदार पैसे का बंदरबांट करके जनते को ना बेवकूफ बना रही है?

चाय की चुस्की लेते-लेते चच्चा कहते हैं- पार्टी वोट ले जाता रहा, विकास के नाम पर कुच्छो किया है?

चाय की चुस्की लेते-लेते चच्चा कहते हैं- पार्टी वोट ले जाता रहा, विकास के नाम पर कुच्छो किया है?

बहुत देर से चुप मार्शल से अब नहीं रहा जाता है…अशोक को देख कर कहने लगता है ‘याद नहीं है कैसे कहरा में ठेकेदार बोरिया बिस्तरा बांध के भागा था? रातोंरात ऊ सब सी ग्रेड का मसाला उझल के रोड पिटवा रहा था? जनता बेवकूफ है क्या। विकास के नाम पर वोट देती जरूर है लेकिन अब नेते नहीं है किसी पार्टी में जिसको वोट दिया जाए तो क्या करें?

बरगंडी डाई किए बाल और हाथ में सलमान वाले ब्रेसलेट पहने लक्की दत्ता (एलटी) ने चुटकी लेते हुए कहा नोटा दबा दीजिए भाईजी…आप ही जैसे परेशान आत्मा सबके लिए विकल्प है।

अखबार के पन्ने पलटता हुआ राकेश कहने लगता है, ‘मजाक छोड़िये भाई, इधर गली-गली में गड्ढा तो उधर पूरा सहरे जाम… फ्लाईओवर का कुच्छो हो पाया आज तक? खाली घोषणे हो रहा है। पप्पा बताते हैं हम जन्मे ही थे तो 96वें में रामविलास पासवान घोषणा किए।

होश संभाले तो हम भी दिग्विजय सिंह,लालू यादव और राजीव रंजन चौधरी को दिलासा देते देखे। देखिए कोसी प्रमंडल के हेड क्वाटर का हाल? दुपहरिया से मक्खी की तरह गाड़ी सब भिनभिना के काड़ फाड़ने लगता है। बंगाली बाजार में शिलान्यास वाला पट्टा ई नेता के विकास पर थूक फेंक रहा है।

उधर महेशखूंट से मधेपुरा-पूर्णिया वाला एनएच भी आज तक बनिये रहा है। इसी पर लेंगे ई सब वोट। सब काम में फोक्कासी में फोटो खिंचाने के लिए दस गो मीडियावाला को बुला के हाथ लगा देना है बस। बांकी कौन देखने जाता है कि क्या हुआ उस योजना का।’

बाली कहने लगा ‘अरे ऐसा नहीं है भैया, ई पब्लिक है और ऊ सब जानती है। इसलिए कुर्सी से उतारना और बिठाना तो हमही लोग डिसाइड करेंगे।’

अचानक से चच्चा का फोन बज उठता है… ऊं नमः शिवाय ऊं नमः शिवाय। कुरते के पाकेट को आधा नोंचते आधा पटकते हुए चच्चा फोन उठाते हैं। कहने लगते हैं ‘अच्छा… अच्छा आ रहे हैं, सोनम को बोलो तैयार रहने। इस बार दूसरे रास्ते से जाएंगे। अकेले नहीं जाए बोल दो। हम आ रहे हैं।’

धूप अब कड़क होने लगी थी तो बॉली और लक्की अपाची से निकल लेते हैं तो मार्शल अशोक को कॉपी में चाय के पैसे लिखवाने लगता है।


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