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PMCH में बेड का बड़ा खेल: कोविड वार्ड से बाहर नहीं आती जानकारी, मेडिकल बुलेटिन पर पर्दा; खाली बेड फिर भी बताया जाता है फुल

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पटना6 मिनट पहले

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PMCH कोविड वार्ड के बाहर का हाल। - Dainik Bhaskar

PMCH कोविड वार्ड के बाहर का हाल।

  • प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में पैरवी से मिलती है बेड, इस कारण मीडिया से भी छिपाई जाती है जानकारी
  • अधीक्षक से भास्कर ने किया सवाल तो बोले कर्मचारियों की कमी से जानकारी नहीं कर पा रही साझा

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज में बेड का बड़ा खेल चल रहा है। कोविड वार्ड में खाली बेड को फुल बताकर हर दिन अधिक संख्या में मरीजों को वापस किया जा रहा है। इस खेल में प्राइवेट अस्पतालों की चांदी हो गई है। यही कारण है कि पटना मेडिकल कॉलेज बेड से जुड़ी जानकारी मेडिकल बुलेटिन में भी साझा नहीं करता है और मीडिया को भी अपडेट देने में पीछा भागता है। खेल बड़ा है और बहाना कर्मचारियों की कमी का है। पटना के सभी बड़े अस्पताल न सिर्फ आम लोगों को मेडिकल बुलेटिन में हर अपडेट देते हैं बल्कि मीडिया को भी एक निश्चित समय पर 24 घंटे का पूरा अपडेट दे देते हैं। इसमें खाली बेडों की संख्या से लेकर हर जानकारी होती है, जो आम जनता के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन पटना मेडिकल कॉलेज में ऐसी अहम जानकारियों को इसलिए छिपाया जाता है ताकि बेड के बड़े खेल पर किसी की नजर न पड़े।

भास्कर कर चुका है मनमानी का खुलासा

दैनिक भास्कर पटना मेडिकल कॉलेज की मनमानी का खुलासा कई बार कर चुका है। जिंदा व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर परिवार वालों को दूसरे की डेड बॉडी देने का बड़ा खुलासा भी सबसे पहले दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म ने किया था। इस बड़ी मनमानी को भी पटना मेडिकल कॉलेज दबाने में लगा था और इसके लिए परिवार वालों पर दबाव और प्रलोभन का भी खेल किया जा रहा था। दैनिक भास्कर ने ही सबसे पहले यह भी खुलासा किया था कि PMCH ने संक्रमित की RTPCR की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद एंटीजन की हाथ से लिखी मैनुअल निगेटिव रिपोर्ट पर अस्पताल से बाहर कर दिया था। ऐसे कई बड़े खुलासे कर दैनिक भास्कर ने PMCH में चल रहे बड़े खेल का खुलासा किया है।

सरकार ने तैनात किए IAS अफसर फिर भी मनमानी

सरकार ने पटना मेडिकल कॉलेज में हुई बड़ी लापरवाही के बाद प्रदेश के तीन बड़े अस्पतालों में IAS अधिकारियोंकी तैनाती कर दी। सरकार ने यह मान लिया कि प्रबंधन पटना मेडिकल कॉलेज में कोविड की व्यवस्था नहीं चला पा रहा है। पटना मेडिकल कॉलेज के साथ साथ नालंदा मेडिकल कॉलेज और एम्स में भी आईएएस अफसरों की तैनाती की गई लेकिन इसके बाद भी पटना मेडिकल कॉलेज की मनमानी जारी है।

AIIMS और NMCH की PMCH में क्यों नहीं पारदर्शिता

AIIMS और NMCH में मरीजों की संख्या और बेडों की संख्या को लेकर पूरी तरह से पारदर्शी होती है। हर दिन 24 घंटे का अपडेट जारी होता है जो मीडिया के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचता है। खाली बेड की संख्या, नए भर्ती होने वाले संक्रमितों की संख्या, 24 घंटे में मरने वाले संक्रमितों की संख्या से लेकर कोविड वार्ड से जुड़ी हर जानकारी संस्थान के नोडल द्वारा मीडिया को दी जाती है। अब सवाल यह है कि पटना मेडिकल कॉलेज ऐसा क्यों नहीं करता है। जब जानकारी लेने का समय होता है तो कोविड के नोडल से लेकर सभी जिम्मेदार फोन तक नहीं उठाते हैं। पटना मेडिकल कॉलेज द्वारा ऐसा किया जाना कई बड़े सवाल खड़ा करता है। मीडिया के माध्यम से जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंचे ऐसा करने के पीछे संस्थान की मंशा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

भास्कर ने किया सवाल तो अधीक्षक ने कर्मचारियों की कमी

प्रधान सचिव के आदेश के बाद भी मेडिकल बुलेटिन में अहम जानकारी साझा नहीं किए जाने के साथ मीडिया को भी जानकारी नहीं देने को लेकर दैनिक भास्कर ने PMCH के अधीक्षक डॉ IS ठाकुर से सीधा सवाल किया। भास्कर ने कई सवालों को लेकर जब जवाब मांगा तो अधीक्षक ने क्या कहा आप भी जान लीजिए।

भास्कर – कोविड से जुड़ी हर सूचना NMCH और AIIMS देता है। आमजन के लिए यह जानकारी साझा करता है कि कितने बेड खाली हैं, वार्ड में मरीजों की क्या स्थिति है। PMCH ऐसी जानकारी क्यों छिपाता है?

अधीक्षक – PMCH कोई जानकारी नहीं छिपाता, डेली रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी जाती है।

भास्कर – आम पब्लिक को कैसे जानकारी मिलेगी, इसके लिए मीडिया को क्यों नहीं जानकारी दी जाती है?

अधीक्षक – जानकारी मांगने पर दे दी जाती है।

भास्कर – अन्य संस्थान बिना मांगे ही जानकारी आम आदमी के लिए मीडिया को साझा कर रहें हैं, PMCH में इस व्यवस्था पर पर्दा क्यों डाला जाता है?

अधीक्षक – दोनो DS नहीं हैं एक डिप्रेशन में हाईकोर्ट चली गईं एक पॉजिटिव हो गए हैं।

भास्कर – जिस तरह अन्य संस्थान जानकारी दे रहे हैं PMCH क्यों नहीं कर रहा है?

अधीक्षक – अधीक्षक क्या क्या करेगा अकेले, नोडल अफसर अधिकृति हैं। उन्हें जानकारी दे देनी चाहिए।

भास्कर – अधीक्षक से लेकर नोडल तक का फोन नहीं उठता है, कैसे किसी को जानकारी मिल पाएगी?

अधीक्षक – जब काम करेगा तो फोन कैसे उठाएगा, मैन पावर की भारी कमी है।

भास्कर – यह बात विभाग के अधिकारियों को क्यों नहीं बताई जाती है, जब अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है तो आम लोगों से क्यों नहीं साझा की जाती?

अधीक्षक – कर्मचारियों की कमी के कारण समस्या है, इस पर विचार किया जाएगा जिससे आम लोगों को जानकारी दी जाए।

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